काशीपुर, 25 जून, 2025 – (समय बोल रहा ) – भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आज काशीपुर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गौतमी हाईट्स होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में देश और उत्तराखंड के लोकतंत्र प्रेमियों ने एकजुट होकर आपातकाल के दमनकारी प्रभावों को याद किया और भविष्य में लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहने का सामूहिक संकल्प दोहराया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह दिन केवल स्मरण का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरंतर सजग रहने का संकल्प दिवस है। मुख्य अतिथि अजय भट्ट: "आपातकाल देश की आत्मा पर हमला था" कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री एवं नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद श्री अजय भट्ट उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए उसे भारतीय इतिहास का एक दुखद और चुनौतीपूर्ण अध्याय बताया। श्री भट्ट ने जोर देते हुए कहा, "आपातकाल देश की आत्मा पर हमला था, जिसे देशवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और संघर्ष ने पीछे धकेला।" उन्होंने बताया कि कैसे उस दौरान नागरिक अधिकारों का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता छीनी गई और राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया गया था। भट्ट ने उन गुमनाम नायकों को भी याद किया जिन्होंने आपातकाल के खिलाफ संघर्ष किया और लोकतंत्र की बहाली के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी से आह्वान किया कि वे आपातकाल के इतिहास से सबक लें और भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति को पनपने न दें, जो लोकतंत्र के मूल्यों को कमजोर करती हो। उनका यह संबोधन लोकतंत्र के प्रति गहरी निष्ठा और उसकी रक्षा के संकल्प को दर्शाता था। मनोज पाल: "वर्तमान पीढ़ी को आपातकाल की सच्चाई बताना आवश्यक" कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी के ऊधमसिंह नगर के जिलाध्यक्ष श्री मनोज पाल ने की। अपने प्रभावशाली संबोधन में उन्होंने आपातकाल के दौरान की सच्चाई को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्ता पर जोर दिया। श्री पाल ने कहा, "आपातकाल की सच्चाई को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है ताकि वह जान सकें कि लोकतंत्र कितने संघर्षों से मिला है।" उन्होंने बताया कि कैसे एक लोकतांत्रिक देश में संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था और आम नागरिकों को भय के माहौल में जीना पड़ा था। मनोज पाल ने युवाओं से आग्रह किया कि वे इतिहास को समझें, लोकतंत्र के महत्व को पहचानें और उसे किसी भी कीमत पर कमजोर न पड़ने दें। उन्होंने कहा कि यह हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम उन संघर्षों को याद रखें जिनके बल पर हमें यह स्वतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था मिली है, और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी तानाशाही प्रवृत्तियां कभी सिर न उठा पाएं। प्रमुख नेताओं व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने बढ़ाया गरिमा इस महत्वपूर्ण अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया और लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में शामिल थे: काशीपुर विधायक श्री त्रिलोक सिंह चीमा काशीपुर मेयर श्री दीपक बाली पीसीयू अध्यक्ष श्री राम मल्होत्रा पूर्व विधायक डॉ. शैलेन्द्र मोहन सिंघल प्रदेश मंत्री श्री गुरविंदर सिंह चंडोक गन्ना राज्य मंत्री श्री मनजीत सिंह राजू पूर्व प्रदेश मंत्री श्रीमती सीमा चौहान निवर्तमान जिला महामंत्री श्री मोहन बिष्ट निवर्तमान जिला महामंत्री डॉ. सुदेश मंडल अध्यक्ष श्री राजकुमार गुंबर मंडल अध्यक्ष श्री पंकज छाबड़ा श्री भास्कर तिवारी पार्षद श्रीमती बिना नेगी पार्षद श्रीमती कल्पना राणा पार्षद श्री जसवीर सिंह सैनी इन सभी नेताओं और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस बात को बल दिया कि लोकतंत्र की रक्षा और आपातकाल जैसे काले अध्याय को याद रखना किसी एक दल या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक कर्तव्य है। लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प दिवस कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि 25 जून का दिन केवल इतिहास के एक काले अध्याय को स्मरण करने का नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहने का संकल्प दिवस है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना होगा, और किसी भी ऐसी शक्ति को पनपने नहीं देना होगा जो लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों को कमजोर करना चाहती हो। वक्ताओं ने प्रेस की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपातकाल ने हमें सिखाया कि लोकतंत्र कितना नाजुक हो सकता है और इसे बनाए रखने के लिए निरंतर चौकसी की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम एक मजबूत संदेश के साथ संपन्न हुआ कि भारतीय समाज अपने लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए हमेशा खड़ा रहेगा और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट रहेगा। इस आयोजन ने न केवल 50 साल पुरानी घटना को याद किया, बल्कि भविष्य के लिए लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रेरणा

आपातकाल के 50 साल: काशीपुर में अजय भट्ट बोले- ‘ये देश की आत्मा पर हमला था’; नई पीढ़ी के लिए अहम संदेश

काशीपुर, 25 जून, 2025 – (समय बोल रहा ) – भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आज काशीपुर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गौतमी हाईट्स होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में देश और उत्तराखंड के लोकतंत्र…

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काशीपुर, 27 जून, 2025 – (समय बोल रहा ) – काशीपुर में अवैध शराब के खिलाफ पैगा चौकी पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुरुवार की देर रात गश्त के दौरान पुलिस टीम ने एक व्यक्ति को 25 लीटर कच्ची शराब के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजय सिंह के रूप में हुई है, जिसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी से इलाके में अवैध शराब के धंधे में लिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है, और पुलिस की इस कार्रवाई को आम जनता द्वारा सराहा जा रहा है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई यह पूरा मामला गुरुवार रात का है, जब पैगा चौकी प्रभारी एसआई दीवान सिंह बिष्ट अपनी टीम के साथ क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे। पुलिस टीम लगातार क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए मुस्तैदी से काम कर रही थी। इसी दौरान, उन्हें एक विश्वसनीय मुखबिर से गुप्त सूचना मिली। मुखबिर ने पुलिस को बताया कि आयुर्वेद अस्पताल के पास स्थित तिराहे पर एक व्यक्ति खुलेआम कच्ची शराब बेच रहा है, जिससे इलाके का माहौल खराब हो रहा है और युवा पीढ़ी गलत रास्ते पर जा सकती है। सूचना की गंभीरता को समझते हुए, चौकी प्रभारी दीवान सिंह बिष्ट ने बिना देर किए अपनी टीम को अलर्ट किया। टीम ने तुरंत योजना बनाई और मुखबिर द्वारा बताए गए स्थान की ओर तेजी से रवाना हो गई। मौके पर पहुंचकर पुलिस टीम ने देखा कि आयुर्वेद अस्पताल के तिराहे के पास वाकई एक व्यक्ति कच्ची शराब बेचते हुए मौजूद था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे चारों ओर से घेर लिया और धर दबोचा। आरोपी को पकड़ने के बाद, पुलिस टीम ने उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान, पुलिस को उसके कब्जे से 25 लीटर कच्ची शराब बरामद हुई, जिसे वह छोटे-छोटे पैकेटों में भरकर बेचने की फिराक में था। अवैध शराब का धंधा: समाज के लिए बड़ा खतरा अवैध कच्ची शराब का निर्माण और उसकी बिक्री समाज के लिए एक गंभीर खतरा है। यह न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे कई सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। अक्सर यह कच्ची शराब बिना किसी गुणवत्ता नियंत्रण के तैयार की जाती है, जिसमें हानिकारक रसायन मिले होते हैं। ऐसे में, इसका सेवन करने वाले लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचता है, और कई बार तो जानलेवा साबित होता है। कच्ची शराब के सेवन से लीवर की बीमारी, अंधापन और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। इसके अलावा, अवैध शराब का धंधा अक्सर अन्य आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़ा होता है। इससे इलाके में अपराध दर बढ़ सकती है, कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है, और सामाजिक अशांति फैल सकती है। ऐसे धंधे अक्सर युवाओं को नशे की लत में धकेलते हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है। पैगा पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई समाज में इन बुराइयों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आबकारी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई पकड़े गए आरोपी अजय सिंह के खिलाफ पुलिस ने आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आबकारी अधिनियम शराब और अन्य नशीले पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन और कब्जे को विनियमित करने के लिए बनाया गया है। अवैध रूप से शराब का उत्पादन या बिक्री करना इस अधिनियम के तहत एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। पुलिस ने बरामद की गई 25 लीटर कच्ची शराब को जब्त कर लिया है और उसे आगे की जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अजय सिंह यह कच्ची शराब कहां से ला रहा था, और इस धंधे में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल हैं। इस मामले में एक विस्तृत जांच की जाएगी ताकि इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। पुलिस की मुस्तैदी और भविष्य की कार्रवाई काशीपुर में पैगा चौकी पुलिस की यह त्वरित और प्रभावी कार्रवाई उनकी मुस्तैदी और अपराधों के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति को दर्शाती है। पुलिस लगातार ऐसे असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए अभियान चला रही है, जो अवैध धंधों से समाज में जहर घोलते हैं। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा और ऐसे किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा जो इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाया जाएगा। इस गिरफ्तारी से यह संदेश गया है कि कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस हर हाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। आरोपी अजय सिंह को अब न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा, जहां से उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह उम्मीद की जाती है कि इस तरह की कार्रवाइयां अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने और समाज में शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होंगी

काशीपुर बड़ी खबर! पैगा पुलिस ने दबोचा शराब तस्कर, 25 लीटर कच्ची शराब के साथ ‘अजय सिंह’ गिरफ्तार, पूरे इलाके में हड़कंप

काशीपुर, 27 जून, 2025 – (समय बोल रहा ) – काशीपुर में अवैध शराब के खिलाफ पैगा चौकी पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुरुवार की देर रात गश्त के दौरान पुलिस टीम ने एक व्यक्ति को 25 लीटर कच्ची शराब के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजय…

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जसपुर, 31 जुलाई 2025 – (समय बोल रहा ) – उत्तराखण्ड में पंचायत चुनाव 2025 की मतगणना अब अपने निर्णायक चरणों की ओर बढ़ रही है। ऊधमसिंहनगर जिले के जसपुर ब्लॉक में चौथे राउंड की मतगणना के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिसने चुनावी दौड़ में शामिल कई ग्राम पंचायतों की तस्वीर साफ कर दी है। इस राउंड के नतीजों में विशेष रूप से महिला और युवा उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला है, जो ग्रामीण राजनीति में एक नए परिवर्तन का संकेत है। मतगणना केंद्र पर कड़ी सुरक्षा के बीच घोषित इन परिणामों से विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। चौथे राउंड में विजयी हुए ग्राम प्रधानों की सूची जसपुर ब्लॉक के चौथे राउंड की मतगणना में कई ग्राम पंचायतों को उनका नया नेतृत्व मिल गया है। इन परिणामों में विभिन्न आरक्षित और अनारक्षित सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। ग्राम धर्मपुर (आरक्षण: अनुसूचित जाति महिला): इस सीट पर नीशू ने जीत दर्ज करते हुए 491 मत प्राप्त किए और सविरोध निर्वाचित हुईं। उनकी जीत धर्मपुर में अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है। ग्राम पूरनपुर (आरक्षण: अनुसूचित जाति महिला): पूरनपुर से मृदुला सागर 507 मतों के साथ विजयी रही हैं। उनकी जीत भी आरक्षित वर्ग में महिला नेतृत्व को मजबूत करती है। ग्राम नादेही (आरक्षण: अन्य पिछड़ा वर्ग): नादेही की सीट पर महेश सिंह ने 329 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। यह जीत उनके क्षेत्र में मजबूत जनाधार का प्रमाण है। ग्राम आसपुर (आरक्षण: अनारक्षित): आसपुर में नरेन्द्र सिंह ने 418 मत प्राप्त कर प्रधान पद पर कब्जा किया है। ग्राम राजपुर (आरक्षण: महिला): राजपुर से इल्मा परवीन ने 1347 मतों के साथ शानदार जीत दर्ज की है, जो उनके प्रति जनता के भारी विश्वास को दर्शाता है। ग्राम गढ़ीहुसैन (आरक्षण: अनारक्षित): गढ़ीहुसैन में रविन्द्र सिंह ने 541 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। ग्राम कलियावाला (आरक्षण: अन्य पिछड़ा वर्ग): कलियावाला से बलजीत कौर 324 मतों के साथ विजयी रहीं, जो ग्रामीण राजनीति में महिला भागीदारी को बढ़ावा देती है। ग्राम कासमपुर (आरक्षण: महिला): कासमपुर में मनोज कुमारी ने 695 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। ग्राम देवीपुरा (आरक्षण: अन्य पिछड़ा वर्ग महिला): देवीपुरा की सीट पर सुलेखा सैनी ने 586 मतों के साथ एक निर्णायक जीत दर्ज की। ग्राम मुरलीवाला (आरक्षण: अनारक्षित): मुरलीवाला से अनुज कुमार ने 381 मत प्राप्त कर प्रधान पद का चुनाव जीता है। ग्राम खेड़ालक्ष्मीपुर (आरक्षण: महिला): खेड़ालक्ष्मीपुर में नाहिद अख्तर 985 मतों के साथ विजयी रहीं, जो महिला नेतृत्व की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। ग्राम सन्यासियोंवाला (आरक्षण: अनारक्षित): सन्यासियोंवाला से आशीष चौहान ने 685 मतों के साथ जीत हासिल की है। ग्राम तालबपुर (आरक्षण: अनारक्षित): तालबपुर में कविता देवी ने 546 मत प्राप्त कर प्रधान पद पर कब्जा किया है। ग्राम नारायणपुर (आरक्षण: अनुसूचित जाति): नारायणपुर से करतार सिंह 493 मतों के साथ विजयी रहे हैं। ग्राम सूरजपुर (आरक्षण: अनारक्षित): सूरजपुर में गुरमेज सिंह ने 339 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। ये नतीजे यह दर्शाते हैं कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनता ने अपने प्रतिनिधि का चुनाव उनकी योग्यता, स्थानीय समस्याओं के प्रति उनकी समझ और उनके वादों के आधार पर किया है। बदलता ग्रामीण परिदृश्य: युवा और महिला नेतृत्व को प्राथमिकता जसपुर ब्लॉक के इन नतीजों में एक खास बात यह भी देखने को मिल रही है कि मतदाताओं ने युवा और महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। आरक्षित और अनारक्षित दोनों सीटों पर महिलाओं की जीत यह साबित करती है कि अब ग्रामीण मतदाता पुराने ढर्रे से बाहर निकलकर नए और सक्षम नेतृत्व को चुन रहे हैं। इल्मा परवीन, नाहिद अख्तर और सुलेखा सैनी जैसी महिला उम्मीदवारों की जीत यह संदेश देती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिला सशक्तिकरण की लहर तेजी से फैल रही है। इन नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने अब अपने-अपने गाँवों में विकास कार्यों को गति देने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी। मतगणना केंद्र पर उत्साह और सुरक्षा का माहौल चौथे राउंड के परिणाम घोषित होने के बाद मतगणना केंद्र पर माहौल काफी गर्मजोशी भरा रहा। विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित किया और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को होने से रोका। मतगणना हॉल में हर एक वोट की गिनती पर प्रत्याशियों के एजेंट पैनी नजर बनाए हुए थे, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही थी। आगे की तस्वीर: अंतिम परिणामों का इंतजार जसपुर ब्लॉक में मतगणना अभी भी जारी है। चौथे राउंड के बाद अब बाकी राउंड के परिणाम भी जल्द ही आने की उम्मीद है। ये परिणाम जहां ग्राम प्रधानों की तस्वीर साफ कर चुके हैं, वहीं क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों के अंतिम परिणाम आने का भी बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन आयोग लगातार अपडेट जारी कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि अगले पांच वर्षों के लिए ग्रामीण उत्तराखण्ड का नेतृत्व किसके हाथों में होगा।

उत्तराखंड में हड़कंप! नामांकन से पहले पंचायत चुनावों पर हाईकोर्ट ने लगाई ‘ब्रेक’, जानें क्यों अटकी पूरी प्रक्रिया?

देहरादून, 23 जून, 2025 – (समय बोल रहा ) – उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। राज्य के बहुप्रतीक्षित पंचायत चुनावों पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राज्य निर्वाचन आयोग…

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काशीपुर, 21 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – उत्तराखंड में मजहबी सिख समुदाय के सशक्तिकरण और एकजुटता की दिशा में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। काशीपुर में उत्तराखंड प्रदेश मजहबी सिख महासभा की विधिवत स्थापना की गई, जिसके साथ ही संगठन की पहली बैठक में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर, सर्वसम्मति से चरणजीत सिंह संजोता को महासभा का पहला अध्यक्ष चुना गया। यह पहल राज्य भर के मजहबी सिख समुदाय को एक मजबूत मंच प्रदान करेगी, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक हितों की रक्षा की जा सकेगी। महासभा की नींव: समुदाय की एकता का प्रतीक उत्तराखंड प्रदेश मजहबी सिख महासभा की स्थापना एक लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता का परिणाम है। मजहबी सिख समुदाय, जो राज्य के विभिन्न हिस्सों में निवास करता है, को अक्सर अपनी विशिष्ट पहचान और जरूरतों को सामने रखने के लिए एक संगठित मंच की कमी महसूस होती थी। आज काशीपुर में इस महासभा की नींव रखे जाने के साथ, समुदाय ने अपनी एकता और सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन किया है। इस स्थापना बैठक के लिए एक निश्चित तिथि निर्धारित की गई थी, जिसके चलते राज्य के कोने-कोने से मजहबी सिख समाज के लोग बड़ी संख्या में काशीपुर पहुंचे। बैठक में समुदाय के भविष्य और उसके उत्थान को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस महासभा का प्राथमिक उद्देश्य मजहबी सिख समुदाय के सभी वर्गों को एक साथ लाना है। यह संगठन समुदाय के भीतर आपसी सहयोग, भाईचारे और समझ को बढ़ावा देगा। साथ ही, यह एक ऐसे सशक्त मंच के रूप में कार्य करेगा जो समुदाय की आवाज को सरकारी स्तर पर और समाज के अन्य वर्गों के सामने प्रभावी ढंग से रख सके। इस स्थापना से समुदाय को अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों में मूल्यों को स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। नेतृत्व का चयन: प्रदेश अध्यक्ष से लेकर सचिव तक, ये हैं मुख्य पदाधिकारी महासभा की स्थापना के साथ ही, आज की बैठक में संगठन के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां भी की गईं। अध्यक्ष से लेकर सचिव तक, सभी पदाधिकारियों का चयन सर्वसम्मति से हुआ, जो समुदाय के भीतर मौजूद एकता को दर्शाता है। उत्तराखंड प्रदेश मजहबी सिख महासभा के नव नियुक्त पदाधिकारी इस प्रकार हैं: प्रदेश अध्यक्ष: चरनजीत सिंह संजोता उपाध्यक्ष: हरनेक सिंह कोषाध्यक्ष: जरनैल सिंह महासचिव: रिंकू बाबा सचिव: लाभ सिंह इन पदाधिकारियों के चुनाव से समुदाय में उत्साह का माहौल है। यह आशा की जा रही है कि यह सशक्त नेतृत्व महासभा को उसके उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने में सफल बनाएगा। अध्यक्ष चरणजीत सिंह संजोता का संकल्प: "तन, मन, धन से साथ रहूंगा" अध्यक्ष चुने जाने के बाद, चरणजीत सिंह संजोता ने महासभा के सभी सदस्यों और समुदाय के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके समाज के लोगों ने उन्हें यह अध्यक्ष का दर्जा दिया है, और वह इस पर खरा उतरने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। संजोता ने अपने संबोधन में मजहबी सिख समुदाय के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ कहा, "मैं मजहबी समाज के सिखों के लिए सदैव तत्पर रहूंगा। जो भी मजहबी समाज आर्थिक रूप से कमजोर है, मैं उसके साथ तन, मन और धन से खड़ा रहूंगा।" यह कथन उनके नेतृत्व की दिशा और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। संजोता ने जोर दिया कि महासभा विशेष रूप से समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता के लिए काम करेगी। इसमें सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना, स्वरोजगार के अवसर पैदा करना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना शामिल होगा। उनका लक्ष्य मजहबी सिख समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाना है, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सशक्त रूप से शामिल हो सकें। प्रमुख सिख भाई रहे उपस्थित: समुदाय की एकजुटता का प्रदर्शन इस ऐतिहासिक बैठक में मजहबी सिख समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति और भाई उपस्थित थे, जिन्होंने इस नई पहल का समर्थन किया। उपस्थित लोगों में रणजीत सिंह, गुरमीत सिंह, लाभ सिंह, कर्म सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, रेशम सिंह, गुरभजन सिंह, और सुखविंदर सिंह जैसे कई प्रमुख सिख भाई शामिल थे। विभिन्न क्षेत्रों से आए इन प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने महासभा की व्यापक पहुंच और समुदाय के भीतर इसकी स्वीकार्यता को दर्शाया। सभी ने मिलकर इस नए संगठन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। महासभा के प्रमुख उद्देश्य: आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड प्रदेश मजहबी सिख महासभा की स्थापना का मुख्य उद्देश्य मजहबी सिख समुदाय के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समुदाय के लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए। महासभा इन योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने, पात्र व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें आवेदन प्रक्रिया में सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अतिरिक्त, महासभा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के तरीके भी तलाशेगी। इसमें छोटे व्यवसायों के लिए सहयोग, शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य आपात स्थितियों में मदद, और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाना शामिल हो सकता है। महासभा सामाजिक एकजुटता बढ़ाने के लिए विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित करेगी, जिससे आपसी भाईचारा मजबूत हो और समुदाय के भीतर एक सकारात्मक वातावरण बने। आज की यह बैठक केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के मजहबी सिख समुदाय के लिए एक नए युग की शुरुआत है। चरणजीत सिंह संजोता के सक्षम नेतृत्व में, और अन्य पदाधिकारियों व समुदाय के सहयोग से, यह महासभा आने वाले समय में समुदाय के हितों की रक्षा और उनके उत्थान के

काशीपुर में ऐतिहासिक पहल: उत्तराखंड प्रदेश मजहबी सिख महासभा की स्थापना, चरणजीत सिंह संजोता बने पहले अध्यक्ष

काशीपुर, 21 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – उत्तराखंड में मजहबी सिख समुदाय के सशक्तिकरण और एकजुटता की दिशा में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। काशीपुर में उत्तराखंड प्रदेश मजहबी सिख महासभा की विधिवत स्थापना की गई, जिसके साथ ही संगठन की पहली बैठक में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की नियुक्ति…

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जसपुर, 31 जुलाई 2025 – (समय बोल रहा ) – उत्तराखण्ड में पंचायत चुनाव 2025 की मतगणना अब अपने निर्णायक चरणों की ओर बढ़ रही है। ऊधमसिंहनगर जिले के जसपुर ब्लॉक में चौथे राउंड की मतगणना के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिसने चुनावी दौड़ में शामिल कई ग्राम पंचायतों की तस्वीर साफ कर दी है। इस राउंड के नतीजों में विशेष रूप से महिला और युवा उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला है, जो ग्रामीण राजनीति में एक नए परिवर्तन का संकेत है। मतगणना केंद्र पर कड़ी सुरक्षा के बीच घोषित इन परिणामों से विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। चौथे राउंड में विजयी हुए ग्राम प्रधानों की सूची जसपुर ब्लॉक के चौथे राउंड की मतगणना में कई ग्राम पंचायतों को उनका नया नेतृत्व मिल गया है। इन परिणामों में विभिन्न आरक्षित और अनारक्षित सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। ग्राम धर्मपुर (आरक्षण: अनुसूचित जाति महिला): इस सीट पर नीशू ने जीत दर्ज करते हुए 491 मत प्राप्त किए और सविरोध निर्वाचित हुईं। उनकी जीत धर्मपुर में अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है। ग्राम पूरनपुर (आरक्षण: अनुसूचित जाति महिला): पूरनपुर से मृदुला सागर 507 मतों के साथ विजयी रही हैं। उनकी जीत भी आरक्षित वर्ग में महिला नेतृत्व को मजबूत करती है। ग्राम नादेही (आरक्षण: अन्य पिछड़ा वर्ग): नादेही की सीट पर महेश सिंह ने 329 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। यह जीत उनके क्षेत्र में मजबूत जनाधार का प्रमाण है। ग्राम आसपुर (आरक्षण: अनारक्षित): आसपुर में नरेन्द्र सिंह ने 418 मत प्राप्त कर प्रधान पद पर कब्जा किया है। ग्राम राजपुर (आरक्षण: महिला): राजपुर से इल्मा परवीन ने 1347 मतों के साथ शानदार जीत दर्ज की है, जो उनके प्रति जनता के भारी विश्वास को दर्शाता है। ग्राम गढ़ीहुसैन (आरक्षण: अनारक्षित): गढ़ीहुसैन में रविन्द्र सिंह ने 541 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। ग्राम कलियावाला (आरक्षण: अन्य पिछड़ा वर्ग): कलियावाला से बलजीत कौर 324 मतों के साथ विजयी रहीं, जो ग्रामीण राजनीति में महिला भागीदारी को बढ़ावा देती है। ग्राम कासमपुर (आरक्षण: महिला): कासमपुर में मनोज कुमारी ने 695 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। ग्राम देवीपुरा (आरक्षण: अन्य पिछड़ा वर्ग महिला): देवीपुरा की सीट पर सुलेखा सैनी ने 586 मतों के साथ एक निर्णायक जीत दर्ज की। ग्राम मुरलीवाला (आरक्षण: अनारक्षित): मुरलीवाला से अनुज कुमार ने 381 मत प्राप्त कर प्रधान पद का चुनाव जीता है। ग्राम खेड़ालक्ष्मीपुर (आरक्षण: महिला): खेड़ालक्ष्मीपुर में नाहिद अख्तर 985 मतों के साथ विजयी रहीं, जो महिला नेतृत्व की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण है। ग्राम सन्यासियोंवाला (आरक्षण: अनारक्षित): सन्यासियोंवाला से आशीष चौहान ने 685 मतों के साथ जीत हासिल की है। ग्राम तालबपुर (आरक्षण: अनारक्षित): तालबपुर में कविता देवी ने 546 मत प्राप्त कर प्रधान पद पर कब्जा किया है। ग्राम नारायणपुर (आरक्षण: अनुसूचित जाति): नारायणपुर से करतार सिंह 493 मतों के साथ विजयी रहे हैं। ग्राम सूरजपुर (आरक्षण: अनारक्षित): सूरजपुर में गुरमेज सिंह ने 339 मत प्राप्त कर जीत हासिल की है। ये नतीजे यह दर्शाते हैं कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनता ने अपने प्रतिनिधि का चुनाव उनकी योग्यता, स्थानीय समस्याओं के प्रति उनकी समझ और उनके वादों के आधार पर किया है। बदलता ग्रामीण परिदृश्य: युवा और महिला नेतृत्व को प्राथमिकता जसपुर ब्लॉक के इन नतीजों में एक खास बात यह भी देखने को मिल रही है कि मतदाताओं ने युवा और महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। आरक्षित और अनारक्षित दोनों सीटों पर महिलाओं की जीत यह साबित करती है कि अब ग्रामीण मतदाता पुराने ढर्रे से बाहर निकलकर नए और सक्षम नेतृत्व को चुन रहे हैं। इल्मा परवीन, नाहिद अख्तर और सुलेखा सैनी जैसी महिला उम्मीदवारों की जीत यह संदेश देती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिला सशक्तिकरण की लहर तेजी से फैल रही है। इन नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने अब अपने-अपने गाँवों में विकास कार्यों को गति देने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी। मतगणना केंद्र पर उत्साह और सुरक्षा का माहौल चौथे राउंड के परिणाम घोषित होने के बाद मतगणना केंद्र पर माहौल काफी गर्मजोशी भरा रहा। विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित किया और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को होने से रोका। मतगणना हॉल में हर एक वोट की गिनती पर प्रत्याशियों के एजेंट पैनी नजर बनाए हुए थे, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही थी। आगे की तस्वीर: अंतिम परिणामों का इंतजार जसपुर ब्लॉक में मतगणना अभी भी जारी है। चौथे राउंड के बाद अब बाकी राउंड के परिणाम भी जल्द ही आने की उम्मीद है। ये परिणाम जहां ग्राम प्रधानों की तस्वीर साफ कर चुके हैं, वहीं क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों के अंतिम परिणाम आने का भी बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन आयोग लगातार अपडेट जारी कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि अगले पांच वर्षों के लिए ग्रामीण उत्तराखण्ड का नेतृत्व किसके हाथों में होगा।

बड़ी खबर! उत्तराखंड चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा , त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, कार्यक्रम: देखें आपके गांव में कब होगी वोटिंग और गिनती की तारीखें!

देहरादून, 22 जून, 2025(समय बोल रहा) – उत्तराखंड के ग्रामीण लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव, औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है! राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को एक धमाकेदार प्रेसवार्ता आयोजित कर पूरे चुनाव कार्यक्रम का विस्तृत ऐलान कर दिया है। इस घोषणा के साथ ही, प्रदेश के 12 जिलों में…

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रूद्रपुर, 19 जून, 2025( समय बोल रहा) - (आंगनबाड़ी कर्मियों ) उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और बाल विकास के क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती रेखा आर्या ने एपीजे अब्दुल कलाम कलेक्ट्रेट सभागार, रूद्रपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में वर्चुअली जुड़कर नव नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर कुल 45 आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों और 218 आंगनबाड़ी सहायिकाओं को उनके नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिनके केंद्रों पर किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं पाई गई थी। इन नियुक्तियों से जिले में बाल विकास सेवाओं को नई गति मिलेगी और हजारों बच्चों व महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों की अहमियत: समाज के नींव का पत्थर आंगनबाड़ी केंद्र भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी कल्याणकारी योजनाओं की रीढ़ हैं। ये केंद्र सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय, खासकर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के लिए एक आधारशिला का काम करते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ती और सहायिकाएं जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पोषण संबंधी परामर्श, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। बच्चों के लिए ये केंद्र उनके प्रारंभिक बचपन के विकास का पहला पायदान होते हैं, जहां उन्हें पोषण युक्त आहार, खेल-खेल में शिक्षा और सामाजिक विकास का अवसर मिलता है। महिलाओं के लिए ये पोषण संबंधी जानकारी, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और विभिन्न सरकारी लाभों का माध्यम बनते हैं। ऐसे में, इन केंद्रों पर रिक्त पदों का भरा जाना अत्यंत आवश्यक था ताकि सेवाओं की निरंतरता और गुणवत्ता बनी रहे। आज की नियुक्तियां रूद्रपुर जिले में इन आवश्यक सेवाओं को और सुदृढ़ करेंगी, जिससे समुदाय के सबसे कमजोर वर्गों को सीधा फायदा मिलेगा। वर्चुअल माध्यम से जुड़कर मंत्री ने दिया उत्साहवर्धन का संदेश नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए आयोजित किया गया, जिससे माननीय मंत्री श्रीमती रेखा आर्या देहरादून से ही वर्चुअल माध्यम से रूद्रपुर के कार्यक्रम से जुड़ सकीं। उन्होंने नव चयनित आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों और सहायिकाओं को बधाई दी और उन्हें उनके भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मंत्री जी ने अपने संबोधन में आंगनबाड़ी कर्मियों की भूमिका के महत्व पर प्रकाश डाला और उनसे ईमानदारी, समर्पण और सेवा भाव के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उनका यह वर्चुअल संवाद नई नियुक्त हुई कर्मियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और उनमें अपने कार्य के प्रति उत्साह भरा। रूद्रपुर में, मंत्री के निर्देशों के अनुरूप, स्थानीय विधायक प्रतिनिधि धीरेश गुप्ता ने सभागार में उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों और सहायिकाओं को व्यक्तिगत रूप से नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान सभागार में खुशी और उत्साह का माहौल था, क्योंकि इन महिलाओं को अब समाज सेवा के एक महत्वपूर्ण कार्य में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिला है। चयन प्रक्रिया और सेवाओं में अपेक्षित सुधार ये 263 नियुक्तियां एक पारदर्शी और सख्त चयन प्रक्रिया के बाद की गई हैं। जिला प्रशासन ने उन केंद्रों को प्राथमिकता दी, जिन पर किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति या विवाद नहीं था, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया में कोई देरी न हो। इन नई नियुक्तियों से जिले भर के आंगनबाड़ी केंद्रों में कर्मियों की कमी दूर होगी, जिससे सेवाओं की दक्षता और पहुंच बढ़ेगी। इन नई कर्मियों की तैनाती से निम्नलिखित क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद है: पोषण स्तर में सुधार: बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं के बीच कुपोषण से निपटने के लिए पोषण अभियान के तहत बेहतर निगरानी और पूरक पोषण आहार का वितरण। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच: नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और बीमारियों से बचाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना। प्रारंभिक बचपन की शिक्षा: बच्चों के बौद्धिक और सामाजिक विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण पूर्व-प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना। जागरूकता कार्यक्रम: स्वच्छता, परिवार नियोजन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाना। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी: गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और सुरक्षित प्रसव के लिए मार्गदर्शन। यह नियुक्तियां केवल संख्यात्मक वृद्धि नहीं हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करती हैं कि रूद्रपुर जिले के हर कोने में, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में, सरकारी सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंच सकें। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अधिकारीगण और भविष्य की कार्ययोजना इस महत्वपूर्ण नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में जिला प्रोबेशन अधिकारी और प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी व्योमा जैन की सक्रिय भूमिका रही। उनके साथ बाल विकास परियोजना अधिकारी सुश्री रेणु यादव, बिमल बाराकोटी, बीना भंडारी, इंद्रा बर्गली, शोभा जनोटी और समस्त जिला कार्यक्रम कार्मिक भी उपस्थित रहे। इन अधिकारियों ने नव नियुक्त कर्मियों को बधाई दी और उन्हें उनके आने वाले कर्तव्यों के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। यह समारोह रूद्रपुर जिले में महिला और बाल विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उम्मीद है कि ये नई नियुक्तियां आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक मजबूत करेंगी, जिससे 'स्वस्थ बच्चे, स्वस्थ माताएं और सशक्त महिलाएं' के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन ने भी संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसी आवश्यकतानुसार नियुक्तियां की जाती रहेंगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई

रूद्रपुर में महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय: 263 आंगनबाड़ी कर्मियों को मिले नियुक्ति पत्र, मंत्री रेखा आर्या ने वर्चुअली दी बधाई

रूद्रपुर, 19 जून, 2025( समय बोल रहा) – (आंगनबाड़ी कर्मियों ) उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण और बाल विकास के क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री, श्रीमती रेखा आर्या ने एपीजे अब्दुल कलाम कलेक्ट्रेट सभागार, रूद्रपुर में आयोजित एक भव्य समारोह में…

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देहरादून, 19 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - उत्तराखंड, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए तो जाना ही जाता है, लेकिन अब इसकी ऐतिहासिक विरासत का एक विशाल और 'छिपा हुआ खजाना' भी सामने आया है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के वैज्ञानिकों ने 15 साल के गहन अध्ययन के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 400 से ज़्यादा ऐतिहासिक किले और गढ़ों की खोज की है। यह चौंकाने वाला खुलासा राज्य के इतिहास और पारंपरिक संरचनाओं के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदल देगा। अब तक जहां लोगों को केवल 52 गढ़ और किले होने की जानकारी थी, वहीं यूसैक ने कुल 403 किलों की पुष्टि की है, जिनमें 235 गढ़ और 168 किले शामिल हैं। 15 साल का अध्ययन: यूसैक की ऐतिहासिक खोज उत्तराखंड अपनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है। परमार, कत्यूर, और चंद जैसे शक्तिशाली राजवंशों ने सदियों तक इस क्षेत्र पर शासन किया और इसके इतिहास को आकार देने में प्रमुख भूमिका निभाई। इन राजवंशों ने अपनी सुरक्षा और शासन व्यवस्था के लिए गढ़ों और किलों का निर्माण किया था। राज्य की इसी अनमोल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जानने और संरक्षित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने एक महत्वाकांक्षी अध्ययन परियोजना हाथ में ली। यूसैक के वैज्ञानिकों ने 2008 से 2023 तक पूरे 15 वर्षों तक राज्य के सभी जिलों में व्यापक सर्वे किया। इस दौरान, उन्होंने अत्याधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जमीनी सर्वेक्षण दोनों का उपयोग करते हुए ऐतिहासिक स्थलों की पहचान की और उनका गहन अध्ययन किया। इस विस्तृत शोध के परिणामस्वरूप, यूसैक ने कुल 403 गढ़ों और किलों की पुष्टि की है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक आम जनता और कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में उत्तराखंड में बमुश्किल 52 गढ़ और किले होने की ही जानकारी थी। इस नई खोज ने राज्य की सैन्य वास्तुकला और सामरिक इतिहास की एक बिल्कुल नई तस्वीर पेश की है। खोजे गए इन 403 संरचनाओं में 235 गढ़ (Garrisons) और 168 किले (Forts) शामिल हैं, जो राज्य के विभिन्न भूभागों में फैले हुए हैं। पौड़ी में सर्वाधिक किले: सामरिक महत्व का प्रमाण यूसैक द्वारा किए गए अध्ययन में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि पौड़ी जिले में सर्वाधिक 108 किले दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके कई महत्वपूर्ण कारण हैं। प्रमुख कारणों में से एक यह है कि पौड़ी जिले में स्थित श्रीनगर, गढ़वाल राजवंश की राजधानी हुआ करती थी। राजधानी होने के नाते, इसकी सुरक्षा के लिए आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किलों और गढ़ों का निर्माण स्वाभाविक था। इसके अलावा, पौड़ी जिला भौगोलिक रूप से कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र की सीमा पर स्थित है। यह एक सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान था, जहां दोनों क्षेत्रों के राजवंशों के बीच अक्सर संघर्ष होते रहते थे। अपनी सीमाओं की रक्षा और नियंत्रण बनाए रखने के लिए, विभिन्न शासकों ने पौड़ी और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किलेबंद संरचनाएं बनवाईं। पौड़ी में सर्वाधिक किले होने के पीछे यही मुख्य सामरिक और ऐतिहासिक कारण बताए जा रहे हैं, जो इस जिले को उत्तराखंड के किलेबंद इतिहास का केंद्र बिंदु बनाता है। अन्य जिलों में भी मौजूद हैं गढ़ और किले: एक विस्तृत सूची यूसैक के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन ने राज्य के अन्य जिलों में भी मौजूद गढ़ों और किलों की विस्तृत जानकारी प्रदान की है। यह जानकारी उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में फैली ऐतिहासिक वास्तुकला की विविधता को दर्शाती है: अल्मोड़ा: आठ गढ़ और 29 किले बागेश्वर: एक गढ़ और 11 किले चमोली: 15 गढ़ और पांच किले चम्पावत: 17 किले देहरादून: 19 गढ़ हरिद्वार: चार गढ़ नैनीताल: 18 किले रुद्रप्रयाग: 19 गढ़ और तीन किले उत्तरकाशी: 18 गढ़ और छह किले ऊधमसिंह नगर: एक किला यह भी रोचक है कि इस अध्ययन में कुछ गढ़ों की स्थिति राज्य की सीमाओं से भी जुड़ी हुई पाई गई है। तीन गढ़ हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित हैं, जबकि दो गढ़ उत्तर प्रदेश की सीमा में भी पाए गए हैं। यह तथ्य इन ऐतिहासिक संरचनाओं के क्षेत्रीय महत्व और राज्यों के बीच प्राचीन काल में रहे संबंधों को दर्शाता है। विरासत संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा: आगे की राह इस खोज का उत्तराखंड के पर्यटन और विरासत संरक्षण पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। ये 403 ऐतिहासिक किले और गढ़ राज्य के पर्यटन मानचित्र पर नए आकर्षण जोड़ सकते हैं। इनके उचित संरक्षण और विकास से न केवल इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं को आकर्षित किया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। इन स्थलों का दस्तावेजीकरण और सार्वजनिक प्रदर्शन उत्तराखंड की समृद्ध ऐतिहासिक पहचान को दुनिया के सामने लाने में मदद करेगा। यूसैक की यह खोज वास्तव में उत्तराखंड के लिए एक 'छिपा हुआ खजाना' है, जिसे अब दुनिया देख सकती है और उसकी समृद्ध विरासत को समझ सकती है।

उत्तराखंड का ‘छिपा खजाना’ सामने आया! स्पेस सेंटर ने खोजे 400 से ज़्यादा ऐतिहासिक किले और गढ़, जानिए आपके ज़िले में कितने!

देहरादून, 19 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – उत्तराखंड, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए तो जाना ही जाता है, लेकिन अब इसकी ऐतिहासिक विरासत का एक विशाल और ‘छिपा हुआ खजाना’ भी सामने आया है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के वैज्ञानिकों ने 15 साल के गहन अध्ययन के बाद राज्य…

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हरिद्वार, 16 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - देश के अन्नदाताओं के भविष्य और उनके सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल आज हरिद्वार में शुरू हो गई है। लाल कोठी परिसर में एक भव्य तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का शुभारंभ हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के किसानों के अधिकारों, उनकी ज्वलंत समस्याओं और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर गहन मंथन करना है। 16 से 18 जून तक चलने वाले इस शिविर में देशभर के विभिन्न राज्यों से आए किसान प्रतिनिधि, पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं, जिससे यह आयोजन किसानों के हितों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। राष्ट्रीय चिंतन शिविर का उद्देश्य और भव्य शुरुआत यह राष्ट्रीय चिंतन शिविर ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब देश का कृषि क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सिंचाई, फसल बीमा, बाजार पहुंच और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए, इस तीन दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया है ताकि इन मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा सके और ठोस समाधान सुझाए जा सकें। आज सुबह शिविर का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें देशभर से आए हजारों किसानों और किसान नेताओं की उपस्थिति ने माहौल को जीवंत बना दिया। शिविर स्थल पर किसानों की भारी भीड़ उत्साह और एकजुटता का प्रदर्शन कर रही थी। आयोजकों ने बताया कि इस चिंतन शिविर से निकलने वाले सुझावों और प्रस्तावों को जल्द ही नीति-निर्माताओं तक पहुंचाया जाएगा, ताकि उन्हें सरकारी नीतियों में शामिल किया जा सके और किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव आ सके। यह शिविर केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि किसानों की आवाज़ को बुलंद करने का एक शक्तिशाली माध्यम बनने वाला है। राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह का गर्मजोशी से स्वागत और प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति कार्यक्रम में राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह के पहुंचने पर किसानों और पदाधिकारियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों और किसानों के नारों के साथ उनका अभिनंदन किया गया, जिससे शिविर स्थल पर एक ऊर्जावान माहौल बन गया। युद्धवीर सिंह देश के किसान आंदोलनों में एक जाना-माना चेहरा हैं और उनकी उपस्थिति ने किसानों में नया जोश भर दिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर देश भर से कई प्रमुख किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं: प्रेम सिंह सहोता, दर्शन सिंह दियोल, बलविंदर सिंह लाड़ी, शेर सिंह, सुखविंदर सिंह पोला, दीदार सिंह, शीतल सिंह, जसवीर सिंह, गुलाब सिंह, हरजिंदर सिंह, पवन सिंह, श्याम अरोड़ा, अर्पित राठी, कमल कुमार, जागीर सिंह, प्रभजोत सिंह, विक्रम सिंह गोराया, बलदेव सिंह, किसन सिंह, और विक्की रंधावा। इन सभी नेताओं की उपस्थिति ने शिविर को एक राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है और यह दर्शाता है कि किसानों के मुद्दे पर देश के कोने-कोने से प्रतिनिधि एक साथ आए हैं। हजारों किसानों की उपस्थिति और विभिन्न सत्रों में होने वाला व्यापक विचार-विमर्श इस शिविर को निश्चित रूप से ऐतिहासिक बना रहा है। जनसेवा और एकता का संदेश: तीनों दिन चलेगी लंगर व्यवस्था इस राष्ट्रीय चिंतन शिविर की एक और खास बात यह है कि इसमें आने वाले सभी प्रतिभागियों और श्रद्धालुओं के लिए तीनों दिन लंगर की भव्य व्यवस्था की गई है। लंगर, जो सिख धर्म की एक पवित्र परंपरा है, निःस्वार्थ सेवा और समानता का प्रतीक है। इस व्यवस्था के माध्यम से, आयोजकों ने न केवल हजारों लोगों के लिए भोजन का प्रबंध किया है, बल्कि जनसेवा और एकता का एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है। लंगर में सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जो सामाजिक समरसता और भाईचारे को बढ़ावा देता है। यह परंपरा यह भी दर्शाती है कि किसान समुदाय न केवल अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है, बल्कि सेवा भाव में भी अग्रणी है। लंगर की व्यवस्था यह भी सुनिश्चित करती है कि देश के दूर-दराज के इलाकों से आए किसानों को भोजन को लेकर किसी तरह की चिंता न करनी पड़े, जिससे वे पूरी तरह से विचार-विमर्श पर ध्यान केंद्रित कर सकें। यह पहल निश्चित रूप से इस शिविर को एक सामाजिक और मानवीय आयाम भी प्रदान करती है, जो केवल राजनीतिक या आर्थिक चर्चा तक सीमित नहीं है। आगे की राह: सुझावों को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह तीन दिवसीय चिंतन शिविर केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें होने वाले विचार-विमर्श और मंथन के बाद जो भी सुझाव, प्रस्ताव और रोडमैप तैयार होंगे, उन्हें एक ठोस दस्तावेज़ के रूप में संकलित किया जाएगा। इस दस्तावेज़ को जल्द ही देश के नीति-निर्माताओं, संबंधित मंत्रालयों और सरकार के उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। लक्ष्य यह है कि किसानों द्वारा उठाई गई आवाज को सुना जाए और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके। यह शिविर किसानों को एक मंच प्रदान करता है जहाँ वे अपनी समस्याओं को खुलकर रख सकते हैं और उनके लिए सामूहिक रूप से समाधान ढूंढ सकते हैं। उम्मीद है कि यह राष्ट्रीय चिंतन शिविर भारतीय कृषि और किसानों के भविष्य के लिए एक नई दिशा प्रदान करेगा और सरकार को ऐ

हरिद्वार में किसानों का महामंथन शुरू! लाल कोठी में 3 दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का भव्य आगाज, देशभर से उमड़े किसान नेता

हरिद्वार, 16 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – देश के अन्नदाताओं के भविष्य और उनके सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल आज हरिद्वार में शुरू हो गई है। लाल कोठी परिसर में एक भव्य तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का शुभारंभ हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के किसानों के अधिकारों, उनकी ज्वलंत समस्याओं और…

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काशीपुर, 16 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह सोमवार को एक व्यस्त और बहुआयामी दौरे पर रहे। उन्होंने सुबह गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में मत्था टेककर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की, वहीं बाद में ऊधमसिंह नगर जिले (जिसमें काशीपुर भी आता है) में अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। राज्यपाल के इस दौरे ने धर्म और जनसेवा के समन्वय का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में आध्यात्मिकता का अनुभव: "बाबा नानक की छवि हर चेहरे पर" सोमवार की शुरुआत राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह और उनके परिवार के लिए अत्यंत आध्यात्मिक रही। उन्होंने उत्तराखंड में स्थित गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब के दर्शन किए। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें बाबा नानक के आदेश से ही गुरुद्वारा ननकाना साहिब के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मुझे यहां हर बंदे के चेहरे पर बाबा नानक की छवि दिखाई दी।" यह दर्शाता है कि गुरुद्वारे का वातावरण और वहां के लोगों की सेवा भावना उन्हें कितनी गहराई से प्रभावित कर गई। राज्यपाल ने गुरुद्वारा परिसर के सरोवर के भी दर्शन किए और वहां के आध्यात्मिक वातावरण, सेवा भावना और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे में जो "पारिवारिक प्रेम" मिला, वह अनुपम है। यह प्रेम, एकता और समर्पण की सच्ची भावना को परिलक्षित करता है, जो गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का मूल है। राज्यपाल ने विशेष रूप से गुरु नानक देव जी के पहले संदेश "एक ओंकार" का उल्लेख किया, जो एकता और परिवार की भावना को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु नानक देव जी द्वारा दिया गया 14 शब्दों का मूल मंत्र संपूर्ण ब्रह्मांड को परिभाषित करता है। राज्यपाल ने बताया कि यहां आकर उन्हें एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता का अनुभव हुआ। उन्होंने बाबा नानक की शिक्षाओं - सादगी, नम्रता, मासूमियत और करुणा - को यहां की सेवा में स्पष्ट रूप से देखा। राज्यपाल ने इस अवसर पर बाबा सुरेंद्र सिंह का भी विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाबा सुरेंद्र सिंह ने गुरुद्वारा साहब को एक ऐसे सेवा स्थल में परिवर्तित कर दिया है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा और शिक्षा की धारा निरंतर प्रवाहित होती है। राज्यपाल ने विशेष रूप से बेटियों और बच्चों के लिए किए जा रहे शैक्षिक प्रयासों को "सराहनीय" और "समाज के लिए प्रेरणा स्रोत" बताया। इस दौरान विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा, बाबा सुरेन्द्र सिंह, बाबा गुरजंत सिंह, बाबा हरि सिंह, बाबा लाखन सिंह, गुरविंदर सिंह चंडोक, दिलप्रीत सेठी व खालसा फांउडेशन के कार्यकर्ता सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। ऊधमसिंह नगर (काशीपुर) में विकास कार्यों की समीक्षा: अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश आध्यात्मिक यात्रा के बाद, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह ने प्रशासनिक मोर्चे पर सक्रियता दिखाते हुए ऊधमसिंह नगर जिले के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली। यह बैठक सोमवार को मंडी गेस्ट हाउस में आयोजित की गई। राज्यपाल ने रुद्रपुर में लिगेसी वेस्ट निस्तारण (पुराने कचरे का प्रबंधन) कार्य की सराहना की, जो जिला प्रशासन के प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने जिला विकास अधिकारी (सीडीओ) को पांच प्रमुख सरकारी योजनाओं की सफलता की कहानियाँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही, सभी 'फ्लैगशिप योजनाओं' (सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाएं) के क्रियान्वयन का लिखित विवरण भी मांगा। यह दर्शाता है कि राज्यपाल योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और उनके वास्तविक प्रभाव को लेकर गंभीर हैं। बैठक में जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने राज्यपाल को जिले में चल रहे विकास कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऊधमसिंह नगर जिला बीस सूत्रीय कार्यक्रम में गत वित्तीय वर्ष में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है। इस उपलब्धि पर राज्यपाल ने जिला प्रशासन की पूरी टीम को बधाई दी। जिलाधिकारी ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के कार्यों की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत जिले में 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है, और शेष 6 प्रतिशत कार्य अंतिम चरण में है। यह भी बताया गया कि जल जीवन मिशन के तहत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में जल संयोजन का कार्य पूरा कर लिया गया है, जिससे बच्चों और कार्यकर्ताओं को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। जनपद में गिर रहे भू-जल स्तर की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए, जिलाधिकारी ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए ग्रीष्मकालीन धान की खेती पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा, जनपद में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को चिह्नित कर उसे हटाने का अभियान भी तेजी से चलाया जा रहा है। ड्रग्स और साइबर अपराध के खिलाफ भी पुलिस और प्रशासन मिलकर अभियान चला रहे हैं, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण कार्रवाईयां की गई हैं। उन्होंने महिला समूहों को मजबूत करने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की भी जानकारी दी। बताया गया कि महिला समूहों को जनपद, प्रदेश और देश के विभिन्न मेलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। इस बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, सीडीओ मनीष कुमार, एसपी क्राइम निहारि

राज्यपाल गुरमीत सिंह का काशीपुर दौरा: ननकाना साहिब में मांगी सुख-शांति, ऊधमसिंह नगर में विकास का हिसाब

काशीपुर, 16 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह सोमवार को एक व्यस्त और बहुआयामी दौरे पर रहे। उन्होंने सुबह गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में मत्था टेककर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की, वहीं बाद में ऊधमसिंह नगर जिले (जिसमें काशीपुर भी आता है) में…

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रुद्रप्रयाग, 15 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - देवभूमि उत्तराखंड के केदारनाथ धाम के पास रविवार को एक हृदय विदारक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उसमें सवार सात लोगों की दुखद मौत हो गई। यह हादसा उत्तराखंड में चारधाम यात्रा मार्ग पर 40 दिनों से भी कम समय में हुई पांचवीं हेलीकॉप्टर दुर्घटना है, जिसने तीर्थयात्रियों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। इस दर्दनाक घटना में पायलट सहित 6 श्रद्धालु, जिनमें एक 23 महीने का बच्चा भी शामिल था, ने अपनी जान गंवा दी। सुबह-सुबह हुआ हादसा: 'आर्यन एविएशन' का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना सुबह लगभग साढ़े पांच बजे हुई। 'आर्यन एविएशन' नामक निजी कंपनी का यह हेलीकॉप्टर केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद गौरीकुंड के घने जंगलों के ऊपर अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना इतनी भीषण थी कि हेलीकॉप्टर से आग की लपटें उठती देखी जा सकती थीं, जिसका एक वीडियो स्थानीय लोगों को प्राप्त हुआ है और वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दुर्घटनास्थल से उठता घना काला धुआं और आग की भयावहता साफ देखी जा सकती है, जो हादसे की गंभीरता को बयान करता है। नंदन सिंह रजवार के अनुसार, शुरुआती जांच में खराब मौसम और कम दृश्यता को इस हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल जाता है और घने कोहरे या बादलों के कारण दृश्यता शून्य हो सकती है, जिससे विमानों का संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मृतकों की पहचान: महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु शामिल रुद्रप्रयाग जिले की पुलिस ने दुर्घटना में जान गंवाने वाले सभी सात लोगों की पहचान की पुष्टि की है। मृतकों में महाराष्ट्र निवासी राजकुमार सुरेश जायसवाल (41), उनकी पत्नी श्रद्धा जायसवाल (35) और उनकी बेटी काशी (23 माह) शामिल हैं। यह परिवार बाबा केदार के दर्शन कर वापस लौट रहा था जब वे इस हादसे का शिकार हो गए। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश निवासी विनोद देवी (66) और तुसथी सिंह (19) भी इस दुर्घटना में मारे गए। उत्तराखंड केदारनाथ निवासी विक्रम तथा हेलीकॉप्टर के पायलट राजवीर सिंह चौहान ने भी अपनी जान गंवाई। इन सभी के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है और तीर्थ यात्रा पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तत्काल राहत एवं बचाव कार्य: एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं। रुद्रप्रयाग के जिला पर्यटन विकास अधिकारी और हेली सेवा के नोडल अधिकारी राहुल चौबे ने बताया कि हेलीकॉप्टर से संपर्क टूटने के तुरंत बाद उसकी खोजबीन शुरू कर दी गई थी, जिसके बाद दुर्घटनास्थल का पता चला। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), पुलिस और अन्य स्थानीय एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू किए गए। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के मलबे के कारण बचाव कार्यों में शुरुआती चुनौती आई, लेकिन टीमों ने अपनी पूरी क्षमता से काम करते हुए मृतकों के शवों को निकालने का प्रयास किया। यह स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों की त्वरित प्रतिक्रिया को दर्शाता है, जो ऐसे आपातकालीन स्थितियों में तुरंत सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित हैं। लगातार हो रही दुर्घटनाएं: सुरक्षा पर गंभीर सवाल केदारनाथ के पास हुई यह दुर्घटना उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्ग पर 40 दिनों से भी कम समय में हुई पांचवीं हेलीकॉप्टर दुर्घटना है।5 यह आंकड़ा हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और पहाड़ी इलाकों में उनके संचालन की चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 8 मई को उत्तरकाशी जिले में: गंगोत्री धाम जा रहा एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी। 7 जून को केदारनाथ जा रहा एक हेलीकॉप्टर: उड़ान भरते ही तकनीकी खराबी के कारण सड़क पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी।6 इस घटना में पायलट को चोटें आई थीं, लेकिन उसमें सवार पांच श्रद्धालु सुरक्षित बच गए थे। इन लगातार हो रही घटनाओं ने तीर्थयात्रियों के मन में हेलीकॉप्टर यात्रा को लेकर भय पैदा कर दिया है। प्रशासन और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को इन दुर्घटनाओं के मूल कारणों की गहन जांच करनी होगी और हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। इसमें मौसम की निगरानी, पायलटों का अनुभव, हेलीकॉप्टरों का रखरखाव और आपातकालीन प्रक्रियाओं का पालन जैसी चीजें शामिल हैं। मुख्यमंत्री का दुख व्यक्त और आगे की जांच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हेलीकॉप्टर दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने का अत्यंत दुखद समाचार मिला है और उन्होंने राज्य आपदा प्रतिवादन बल सहित अन्य एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। यह घटना निश्चित रूप से एक विस्तृत जांच का विषय है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और अन्य संबंधित नियामक प्राधिकरण इस दुर्घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच शुरू करेंगे। इस जांच में ब्लैक बॉक्स डेटा, पायलट-एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग, हेलीकॉप्टर का रखरखाव रिकॉर्ड और मौसम संबंधी जानकारी का गहन विश्लेषण किया जाएगा। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके और चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं पूरी तरह सुरक्षित रहें।

केदारनाथ में भीषण हेलीकॉप्टर दुर्घटना: 2 माह में 5वीं घटना, 7 की मौत; जानें कैसे हुआ ये दर्दनाक हादसा!

रुद्रप्रयाग, 15 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – देवभूमि उत्तराखंड के केदारनाथ धाम के पास रविवार को एक हृदय विदारक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उसमें सवार सात लोगों की दुखद मौत हो गई। यह हादसा उत्तराखंड में चारधाम यात्रा मार्ग पर 40 दिनों से भी कम समय में हुई पांचवीं हेलीकॉप्टर दुर्घटना है, जिसने तीर्थयात्रियों…

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