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रुद्रपुर, 12 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - (आंगनबाड़ी केंद्र 5 दिन के लिए बंद) उत्तराखंड में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी के मद्देनजर, उधम सिंह नगर जिले के बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। उत्तराखंड शासन के निर्देशों और जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद, जिले भर के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों में 13 जून 2025 से 17 जून 2025 तक कुल 5 दिनों का ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। यह फैसला बच्चों को चिलचिलाती धूप और लू से बचाने के लिए लिया गया है, जिससे उन्हें कुछ राहत मिल सके। भीषण गर्मी का प्रभाव और बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता उत्तराखंड के मैदानी और तराई क्षेत्रों में जून के महीने में तापमान लगातार बढ़ रहा है। सूरज की तपिश और लू के थपेड़े लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर रहे हैं। ऐसे में छोटे बच्चों, खासकर आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा और गंभीर असर पड़ सकता है। छोटे बच्चे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं और उनमें डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इसी चिंता को देखते हुए, उधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है। प्रशासन का मानना है कि बच्चों को इतनी भीषण गर्मी में घर से आंगनबाड़ी केंद्र तक लाना और फिर दिन भर वहां रखना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। यह निर्णय स्पष्ट रूप से दिखाता है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। आदेश का विवरण: कौन प्रभावित होगा और कौन नहीं? जिला कार्यक्रम अधिकारी व्योमा जैन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह अवकाश 13 जून 2025 (शुक्रवार) से शुरू होकर 17 जून 2025 (मंगलवार) तक चलेगा। इस दौरान जिले के सभी सरकारी और गैर-सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह से बंद रहेंगे। यह आदेश सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायक कर्मियों पर लागू होगा, जिसका अर्थ है कि वे भी इन पांच दिनों के लिए अवकाश पर रहेंगे। हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवकाश के दौरान विभागीय कार्य पहले की तरह चलते रहेंगे। इसका मतलब है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायक कर्मी बच्चों से संबंधित सीधे सेवाओं (जैसे शिक्षण या पोषण कार्यक्रम का प्रत्यक्ष संचालन) से दूर रहेंगे, लेकिन उन्हें अपने प्रशासनिक या अन्य गैर-प्रत्यक्ष विभागीय कार्यों को जारी रखना होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि अवकाश के कारण महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधियां बाधित न हों। यह फैसला बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है, जबकि यह भी ध्यान रखा गया है कि आंगनबाड़ी विभाग का दैनिक संचालन प्रभावित न हो। जिलाधिकारी का अनुमोदन और शासन के निर्देश यह महत्वपूर्ण निर्णय उत्तराखंड शासन द्वारा जारी निर्देशों और जिला अधिकारी (उधम सिंह नगर) के अनुमोदन के बाद ही लिया गया है। यह दर्शाता है कि यह एक सुनियोजित और उच्च स्तरीय निर्णय है, जो केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यव्यापी निर्देशों का पालन है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बिना ऐसे महत्वपूर्ण अवकाश की घोषणा संभव नहीं होती। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पूरे देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और विभिन्न राज्यों में स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में छुट्टियां घोषित की जा रही हैं। उधम सिंह नगर जिले में भी लगातार बढ़ रहा तापमान बच्चों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा था, जिसे देखते हुए यह अवकाश बेहद आवश्यक माना जा रहा था। इस घोषणा से न केवल बच्चों को राहत मिलेगी, बल्कि उनके माता-पिता और अभिभावक भी निश्चिंत हो सकेंगे कि उनके बच्चे सुरक्षित रहेंगे। यह जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और जनहितैषी नीतियों का एक उदाहरण है।

उत्तराखंड में गर्मी का कहर! उधम सिंह नगर के सभी आंगनबाड़ी केंद्र 5 दिन के लिए बंद, बच्चों को मिली राहत

रुद्रपुर, 12 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – (आंगनबाड़ी केंद्र 5 दिन के लिए बंद) उत्तराखंड में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी के मद्देनजर, उधम सिंह नगर जिले के बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। उत्तराखंड शासन…

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नैनीताल, 12 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में बाबा नीब करौरी महाराज के स्थापना दिवस (15 जून) को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल यह पावन दिन रविवार को पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड तोड़ भीड़ जुटने की उम्मीद है। अनुमान है कि करीब तीन लाख श्रद्धालु इस बार कैंची धाम पहुंचेंगे, जिसके चलते भवाली से कैंची धाम तक के सभी होटल, गेस्ट हाउस और होम स्टे पूरी तरह से पैक हो चुके हैं। प्रशासन और मंदिर समिति ने भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसमें विशेष शटल सेवा और पार्किंग व्यवस्था भी शामिल है। आस्था का सैलाब: होटल और गेस्ट हाउस हुए 'फुल', हल्द्वानी तक पहुंचे श्रद्धालु कैंची धाम के स्थापना दिवस के लिए भक्तों का उत्साह चरम पर है। 15 जून के लिए श्रद्धालुओं ने कई हफ्तों पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसका असर यह हुआ है कि भवाली से कैंची धाम तक के सभी होटल, गेस्ट हाउस और होम स्टे में एडवांस बुकिंग हो चुकी है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद कपिल ने बताया कि नगर व आसपास के 100 से अधिक होटल 15 जून तक पूरी तरह से बुक हो चुके हैं, और स्थिति यह है कि कई श्रद्धालुओं को अब हल्द्वानी के होटलों में रुकना पड़ रहा है। यह दर्शाता है कि बाबा नीब करौरी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था कितनी गहरी है। बुधवार को भी मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जो आने वाले दिनों में और बढ़ने का संकेत है। मंदिर समिति ने मालपुए बनाने का काम भी बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है, जो इस उत्सव का एक अभिन्न अंग है। धाम के पास की सड़क पर श्रद्धालुओं की कतार के लिए विशेष रूप से मैट बिछाई जा रही हैं ताकि उन्हें खड़े रहने में सुविधा हो। परिवहन विभाग की खास तैयारी: कैंची धाम के लिए शटल सेवा शुरू श्रद्धालुओं को मेले में शामिल होने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए परिवहन विभाग ने विशेष इंतजाम किए हैं। आरटीओ (प्रवर्तन) गुरुदेव सिंह ने बताया कि 14 जून से कैंची मंदिर के लिए सुबह 5 बजे से शटल सेवा शुरू कर दी जाएगी। यह सेवा 15 जून की रात तक, सभी श्रद्धालुओं को वापस भवाली और अन्य पार्किंग स्थलों तक सुरक्षित पहुंचाने तक संचालित रहेगी। शटल सेवा में जाने वाले यात्रियों से सरकार की ओर से निर्धारित दरों के मुताबिक ही टिकट लिया जाएगा, जिससे किसी भी तरह की अतिरिक्त वसूली न हो। हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से 80 शटल वाहन, बस स्टेशन से 50 बसें, भीमताल से 40 बसें और 60 शटल वाहन चलेंगे। इसके अतिरिक्त, ग्राफिक एरा से 30 बसें शटल सेवा में चलेंगी, और भवाली से 80 से अधिक शटल वाहन उपलब्ध रहेंगे। केमू की बसें भी इस सेवा में शामिल की गई हैं, जिनमें 110 बसें काठगोदाम रेलवे स्टेशन व केमू स्टेशन से भवाली तक और 20 बसें भीमताल से भवाली तक चलेंगी। कैंची मंदिर के लिए विशेष रूप से 20 बसें भवाली सेनिटोरियम से और 10 बसें नैनीताल से संचालित होंगी। मैक्स (8 सीटर) वाहन भी उपलब्ध रहेंगे, जिनमें 25 काठगोदाम रेलवे स्टेशन से कैंची मंदिर और 10 नैनीताल से कैंची मंदिर तक संचालित होंगी। अधिकारियों का निरीक्षण और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश बुधवार को सेनिटोरियम बाईपास में एडीएम विवेक रॉय और आरटीओ गुरुदेव सिंह ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने टैक्सी चालकों और मालिकों से मुलाकात कर कैंची धाम स्थापना दिवस पर लगने वाले मेले में शटल सेवा के संचालन को लेकर विस्तार से चर्चा की। एडीएम विवेक रॉय ने चालकों की समस्याओं का निस्तारण किया और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शटल वाहनों में पीले रंग की पट्टी लगाई जाएगी ताकि उनकी पहचान आसान हो सके। साथ ही, उन्होंने सख्त हिदायत दी कि कोई भी वाहन चालक निर्धारित सीट से अधिक लोगों को नहीं बैठाएगा और नशा करके वाहन नहीं चलाएगा। यात्रियों से तय किराया ही लेने पर भी जोर दिया गया। सभी शटल वाहन फॉरेस्ट बैरियर से घूमकर वापस आएंगे, जिससे यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। पार्किंग और मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विभिन्न स्थानों पर पार्किंग स्थल भी बनाए हैं। प्रमुख पार्किंग स्थलों में कैंची धाम परिसर, पनी राम ढाबा, भवाली पुराना रोडवेज स्टेशन, सेनिटोरियम मध्य रातीघाट मार्ग, फरसोली परिवहन निगम, विकास भवन पार्किंग, भवाली मस्जिद के पास, नगर पालिका भवाली मैदान, खैरना मंडी पार्किंग, कैंची प्राइवेट पार्किंग, भवाली जल संस्थान कैंपस, भवाली श्यामखेत घोड़ाखाल मार्ग, भवाली बाई पास डंपिंग जोन और नैनी बैंड रोड पार्किंग शामिल हैं। भवाली रोडवेज स्टेशन परिसर में दोपहिया वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पालिका भवाली के साथ-साथ किच्छा और दिनेशपुर से भी फैब्रिकेटेड शौचालय मंगाए गए हैं। भीमताल में सिडकुल के सहयोग से लाइटों की व्यवस्था की गई है ताकि रात में भी श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। आरटीओ गुरुदेव सिंह ने बताया कि प्रशासन और परिवहन विभाग ने मिलकर श्रद्धालुओं को लाने-ले जाने की पुख्ता व्यवस्था की है, और हल्द्वानी तक बसें चलाई जा रही हैं। उन्होंने ब

कैंची धाम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब! 15 जून स्थापना दिवस के लिए जोरदार तैयारियां, होटल पैक, जानें शटल सेवा और पार्किंग की पूरी डिटेल्स!

नैनीताल, 12 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में बाबा नीब करौरी महाराज के स्थापना दिवस (15 जून) को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल यह पावन दिन रविवार को पड़ने के कारण श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड तोड़ भीड़ जुटने की उम्मीद है। अनुमान है कि करीब तीन लाख…

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बाजपुर, 11 जून, 2025 (समय बोल रहा) - बाजपुर में मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है! जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणीकांत मिश्रा के कड़े निर्देशों के बाद, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम ने बाजपुर क्षेत्र के मेडिकल स्टोरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस औचक कार्रवाई में कृष्णा मेडिकल स्टोर और जगदीश मेडिकल स्टोर में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद उनके लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति करते हुए दोनों मेडिकल स्टोरों को तत्काल बंद करा दिया गया। यह कार्रवाई प्रदेश भर में अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अधिकारियों के कड़े निर्देश: औचक निरीक्षण का सिलसिला शुरू जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दवाओं की उपलब्धता में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणीकांत मिश्रा ने सख्त निर्देश जारी किए थे। इन्हीं निर्देशों के क्रम में, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया, जिसमें पुलिस बल भी शामिल था। इस टीम का मुख्य उद्देश्य बाजपुर क्षेत्र के मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण करना था ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधियों को रोका जा सके। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पूरे प्रदेश में दवाओं के अवैध भंडारण, बिना फार्मासिस्ट के स्टोर चलाने और नशीली दवाओं की बिक्री पर लगाम कसने के लिए प्रशासन सक्रिय है। टीम ने बुधवार को बाजपुर के कई प्रमुख मेडिकल स्टोरों को निशाने पर लिया, जिनमें कृष्णा मेडिकल स्टोर, जगदीश मेडिकल स्टोर, जय मेडिकल स्टोर और ओम मेडिकल स्टोर शामिल थे। इन औचक निरीक्षणों का मकसद यह जांचना था कि मेडिकल स्टोर नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, दवाओं का उचित रख-रखाव हो रहा है या नहीं, और क्या दवाओं की बिक्री के लिए फार्मासिस्ट मौजूद हैं। दो मेडिकल स्टोरों पर गंभीर अनियमितताएं, लाइसेंस निलंबन की संस्तुति संयुक्त टीम के निरीक्षण के दौरान, कृष्णा मेडिकल स्टोर पर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि निरीक्षण के समय स्टोर पर फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिला, जो कि मेडिकल स्टोर चलाने के लिए एक अनिवार्य शर्त है। इसके अलावा, मन प्रभावी औषधियों (साइकोट्रॉपिक ड्रग्स) का बिल सत्यापन भी नहीं पाया गया, जो इन दवाओं की बिक्री और खरीद में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। ये अनियमितताएं बेहद गंभीर मानी जाती हैं, क्योंकि बिना फार्मासिस्ट के दवाओं की बिक्री से गलत दवा दिए जाने का खतरा रहता है, और मन प्रभावी औषधियों का अनियमित लेनदेन नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को बढ़ावा दे सकता है। इन गंभीर उल्लंघनों के कारण, कृष्णा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति करते हुए उसे तत्काल बंद करा दिया गया। इसी तरह, जगदीश मेडिकल स्टोर पर भी चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं। इस स्टोर पर भी फार्मासिस्ट मौजूद नहीं मिला, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। मन प्रभावी औषधियों का बिल सत्यापन भी यहां नहीं पाया गया, जिससे इनकी खरीद-बिक्री में संदिग्धता का संदेह हुआ। इसके अतिरिक्त, जगदीश मेडिकल स्टोर पर फिजिशियन सैंपल (डॉक्टरों को निःशुल्क दिए जाने वाले दवा के नमूने) भी पाए गए, जिन्हें बेचना या व्यावसायिक उपयोग में लाना अवैध है। इन सभी गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए, जगदीश मेडिकल स्टोर का लाइसेंस भी निलंबित करने की संस्तुति की गई और उसे तुरंत बंद करा दिया गया। साथ ही, जांच के लिए जगदीश मेडिकल स्टोर से 03 औषधियों के नमूने भी एकत्र किए गए, जिन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि उनकी गुणवत्ता और वैधता सुनिश्चित की जा सके। अन्य स्टोरों को निर्देश और भविष्य की कार्रवाई निरीक्षण के दौरान, ओम मेडिकल स्टोर पर कुछ मामूली अनियमितताएं पाई गईं, लेकिन वे उतनी गंभीर नहीं थीं कि तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाए। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार ने ओम मेडिकल स्टोर को दवाओं के रख-रखाव को बेहतर बनाने और टीबी (तपेदिक) की दवाओं के लिए प्रथक पंजिका (अलग रजिस्टर) बनाने के निर्देश दिए। यह सुनिश्चित करने के लिए है कि टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा जाए और उनका दुरुपयोग न हो। नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सिर्फ एक शुरुआत है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, जनपद के सभी मेडिकल स्टोरों का लगातार और सघन निरीक्षण किया जाएगा। यह अभियान दवाओं की गुणवत्ता, उनकी अवैध बिक्री पर रोक लगाने और फार्मासिस्ट की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जारी रहेगा। संयुक्त टीम में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार के साथ औषधि निरीक्षक शुभम कोटनाला, निधि शर्मा, अर्चना गहतोड़ी, पूजा जोशी, पूजा रानी शर्मा, पंकज पंत, हर्षिता और बाजपुर कोतवाली पुलिस के जवान शामिल थे। इस छापेमारी अभियान से बाजपुर के मेडिकल स्टोर संचालकों में एक स्पष्ट संदेश गया है कि नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन दवाओं की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और बिना लाइसेंस या फार्मासिस्ट के स्टोर चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

बाजपुर में मेडिकल स्टोर पर ताबड़तोड़ छापेमारी: इन दो बड़े स्टोरों पर ताला, लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश; जानिए क्यों हुई ये कार्रवाई!

बाजपुर, 11 जून, 2025 (समय बोल रहा) – बाजपुर में मेडिकल स्टोर संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है! जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणीकांत मिश्रा के कड़े निर्देशों के बाद, वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम ने बाजपुर क्षेत्र के मेडिकल स्टोरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।…

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काशीपुर , 11 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - देशभक्ति और आध्यात्म के अनूठे संगम के साथ, काशीपुर में 'शौर्य सम्मान यात्रा' का भव्य आयोजन किया गया। नगर पंचायत गढ़ीनेगी से हरेश्वर धाम मंदिर (महाराज हरि चैतन्यपुरी आश्रम) के प्रांगण से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की तादाद में भक्तजन उमड़ पड़े, जिन्होंने पूरे माहौल को भक्ति और राष्ट्रप्रेम से सराबोर कर दिया। महिलाएं, युवा और बच्चे सभी उत्साह से भरे इस आयोजन का हिस्सा बने। यात्रा में बैंड-बाजा देशभक्ति की धुनें बिखेर रहा था, वहीं खुली जीप में विराजमान महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु जी ने भक्तों को आशीर्वाद दिया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और ऊर्जावान हो गया। गढ़ीनेगी से करनपुर तक गूंजे देशभक्ति के जयकारे: हर कदम पर जलपान की व्यवस्था 'शौर्य सम्मान यात्रा' का शुभारंभ गढ़ीनेगी स्थित हरेश्वर धाम मंदिर से हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का जमावड़ा शुरू हो गया था, जो इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आतुर थे। जैसे ही यात्रा आगे बढ़ी, हजारों की संख्या में भक्तजन, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, हाथों में तिरंगा झंडा और कलश लिए आगे बढ़ने लगे। बैंड-बाजे की गूंजती धुनें और देशभक्ति के नारे यात्रा में जोश भर रहे थे। महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु स्वयं एक खुली जीप में विराजमान थे, जिससे सड़क के दोनों ओर खड़े भक्तजन उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी और प्रेरणादायक था, जिसने पूरे क्षेत्र में देशभक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का संचार कर दिया। गढ़ीनेगी हरेश्वर धाम से शुरू होकर यह यात्रा करनपुर ग्राम स्थित ए.एन.झा इंटर कॉलेज में आकर संपन्न हुई। यात्रा मार्ग में कई भक्तजनों और सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पर जलपान की उत्कृष्ट व्यवस्था की थी। भीषण गर्मी के बावजूद, लोगों ने ठंडे शर्बत, कोल्डड्रिंक, स्वच्छ पेयजल, छोले और केले आदि का प्रसाद वितरित किया, जिससे यात्रा में शामिल सभी भक्तों को नई ऊर्जा मिलती रही। राकेश कुमार ढींगरा उर्फ काला, रमन ढींगरा, सुरेश लोहिया, कंचन लोहिया, आकांक्षा ठाकुर, पूजा सुविधा, अभिषेक सुखीजा , युवा शक्ति परिवार, नवल, गुरजीत सिंह, लवकुश प्रजापति, भास्कर तिवारी, रूपेश बाठला , किशोर झाम, चंद्रमोहन सुधा, मुकेश सुधा और पुनीत बाठला आदि ने विशेष रूप से इन जलपान व्यवस्थाओं को संभाला, जिससे यात्रा में शामिल सभी लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु का गुरुद्वारे में भी जाना: भाईचारे का संदेश यात्रा के दौरान एक ऐसा क्षण भी आया जिसने सभी का दिल जीत लिया और सांप्रदायिक सौहार्द का एक मजबूत संदेश दिया। जब यह भव्य शोभायात्रा करनपुर के मिलाप नगर स्थित गुरुद्वारे में पहुंची, तो महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु जी अपनी जीप से नीचे उतरे। उन्होंने पैदल चलकर गुरुद्वारे में प्रवेश किया और पूरी श्रद्धा के साथ माथा टेका। महाराज जी का गुरुद्वारे में जाकर मत्था टेकना सिख और हिंदू समुदाय के बीच भाईचारे और एकता का एक सशक्त प्रतीक बन गया, जिसकी सभी ने खुले दिल से सराहना की। यह घटना दर्शाती है कि आध्यात्म किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी को जोड़ता है। गुरुद्वारे से निकलने के बाद, महाराज जी ने अपनी पदयात्रा जारी रखी और ए.एन.झा इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार तक पैदल पहुंचे। इस दौरान मार्ग में अनेकों लोगों ने फूलों की माला पहनाकर और जयकारे लगाकर उनका भव्य स्वागत किया। यह क्षण भक्तों के लिए विशेष था, क्योंकि उन्हें अपने आराध्य के और करीब आने का अवसर मिला। महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु जी के सानिध्य में ज्ञान की वर्षा: शौर्य सम्मान समारोह का आध्यात्मिक पहलू "शौर्य सम्मान समारोह" को आध्यात्मिक गहराई प्रदान करने के लिए, 11 जून से 12 जून तक , दिव्य प्रवचनों का आयोजन किया जाएगा। ये प्रवचन *श्री हरिकृपा पीठाधीश्वर स्वामी श्री हरि चैतन्य महाप्रभु * द्वारा दिए जाएंगे। उनके प्रवचनों में आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति की सरिता बहेगी, जो श्रोताओं को आत्मिक शांति और जीवन के उच्च मूल्यों की ओर प्रेरित करेगी। ये प्रवचन न केवल देशभक्ति की भावना को आध्यात्मिकता से जोड़ेंगे, बल्कि उपस्थित लोगों को मानसिक और आत्मिक रूप से भी सशक्त करेंगे। स्वामी जी के प्रवचन जीवन के उद्देश्य, शांति, प्रेम और सेवा के महत्व पर केंद्रित होंगे, जो इस संपूर्ण आयोजन को एक समग्र और सार्थक आयाम प्रदान करेंगे। देशभक्ति के साथ आध्यात्म का यह संगम कार्यक्रम को एक अनूठा और गहरा महत्व प्रदान करेगा। प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति: समाज का समर्थन इस महत्वपूर्ण यात्रा और कार्यक्रम में समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को अपना समर्थन दिया। इनमें पूर्व सांसद प्रतिनिधि रवि साहनी, गुरनाम सिंह, कश्मीर सिंह पन्नू, बलजिंदर संधू, विजय मक्कर, पंकज छाबड़ा और पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल जैसे गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। इन सभी की उपस्थिति ने इस 'शौर्य सम्मान यात्रा' के महत्व को और बढ़ाया और यह संदेश दिया कि पूरा समाज सैनिकों के सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति एकजुट है। यह आयोजन काशीपुर के लिए एक ऐतिहासिक पल बन गया, जो देशभक्ति

काशीपुर में विशाल ‘शौर्य सम्मान यात्रा’: हरिचैतन्यपुरी के सानिध्य में उमड़ा हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब, महाराज गुरुद्वारे भी गए!

काशीपुर , 11 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – देशभक्ति और आध्यात्म के अनूठे संगम के साथ, काशीपुर में ‘शौर्य सम्मान यात्रा’ का भव्य आयोजन किया गया। नगर पंचायत गढ़ीनेगी से हरेश्वर धाम मंदिर (महाराज हरि चैतन्यपुरी आश्रम) के प्रांगण से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की तादाद में भक्तजन उमड़ पड़े, जिन्होंने…

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हरिद्वार, 10 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - (गजराज )आमतौर पर सड़कों पर वाहनों का लंबा जाम खुलवाने का जिम्मा ट्रैफिक पुलिस के जवानों का होता है, लेकिन उत्तराखंड के हरिद्वार में रविवार को एक ऐसा अनोखा और अविस्मरणीय नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां वाहनों की लंबी कतारों के बीच से अचानक एक विशालकाय हाथी आ पहुंचा, जिसने मानो स्वयं ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने का बीड़ा उठा लिया हो। इस अप्रत्याशित घटना को देखकर लोग स्तब्ध रह गए और तुरंत अपने मोबाइल फोन निकाल कर इस दुर्लभ क्षण को कैमरे में कैद करने लगे। इस पूरी घटना का एक 41 से 49 सेकेंड का वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिस पर यूजर्स तरह-तरह की मजेदार और विचारोत्तेजक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। अचानक गजराज का आगमन: ट्रैफिक पुलिस की जगह हाथी ने दी दस्तक रविवार का यह वीडियो हरिद्वार के एक व्यस्त मार्ग का बताया जा रहा है, जहां दिन के समय वाहनों की आवाजाही सामान्य से अधिक थी और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई थी। लोग अपनी गाड़ियों में फंसे हुए थे और बेसब्री से जाम खुलने का इंतजार कर रहे थे, तभी यह अप्रत्याशित घटना घटी। कहीं से धीमी चाल चलते हुए एक हाथी अचानक वहां आ पहुंचा और वाहनों के बीच से धैर्यपूर्वक गुजरने लगा। हाथी को अपने ठीक सामने या बगल से गुजरते देख वाहन चालक और उनमें बैठे यात्री पहले तो चौंक गए, फिर इस अनोखे दृश्य को अपनी आंखों और मोबाइल के कैमरों में कैद करने लगे। यह एक ऐसा पल था जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, जहां प्रकृति का एक विशाल जीव मानवीय यातायात के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गाड़ियां एक कतार में खड़ी हैं और गजराज बड़े आराम से उनके बीच से निकल रहे हैं, मानों वह स्वयं एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी हों जो राह बना रहे हों। एक यूजर ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा, "हरिद्वार में जाम लग गया, गजराज जी जाम खुलवाने पहुंच गए।" इस कैप्शन ने वीडियो को और अधिक हास्यपूर्ण बना दिया और इसे तेजी से वायरल होने में मदद मिली। हालांकि, यह भी सच है कि गजराज के लिए भी इतना लंबा जाम खुलवाना आसान नहीं था, क्योंकि वाहनों की संख्या बहुत अधिक थी। फिर भी, इस अद्वितीय दृश्य ने लोगों का खूब मनोरंजन किया और उन्हें कुछ देर के लिए जाम की परेशानी भुला दी। सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं: मनोरंजन, चिंता और कटाक्ष इस वायरल वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की ढेरों और बेहद विविध प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ लोग इस घटना को सिर्फ एक मनोरंजक वीडियो के रूप में देख रहे हैं और उस पर हल्के-फुल्के कमेंट कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स ने इस पर गहरी चिंता और कटाक्ष भी व्यक्त किया है। एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा कि "बताओ अपने घर में जाने में ही कितनी दिक्कत हो रही है।" यह टिप्पणी हाथियों के प्राकृतिक आवासों के सिकुड़ने और उनके रास्तों में मानवीय अतिक्रमण के कारण उत्पन्न हो रही समस्याओं की ओर गंभीर रूप से इशारा करती है। यह सवाल उठाती है कि जब इंसान अपने घर जाने में मुश्किल महसूस करता है, तो वन्यजीवों का क्या हाल होगा, जिनके घर हम उजाड़ रहे हैं। एक अन्य यूजर ने वीडियो में हॉर्न बजा रहे लोगों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए लिखा, "पागल लोग हॉर्न बजा रहे हैं। हाथी कॉरिडोर थे ये सब, जिन्हें 4 लेन बना दिया है विकास के नाम पर। सच में उत्तर भारत का कुछ नहीं हो सकता।" यह टिप्पणी विकास परियोजनाओं के नाम पर वन्यजीव गलियारों के अंधाधुंध अतिक्रमण को लेकर गहरी चिंता जाहिर करती है और इसे 'विकास' के नाम पर विनाश करार देती है। यह मुद्दा लंबे समय से पर्यावरणविदों द्वारा उठाया जा रहा है। वहीं, एक अन्य यूजर ने हाथी की स्थिति पर गहरी सहानुभूति व्यक्त करते हुए लिखा, "जाम में मुसाफिर तो फंसे ही थे, लेकिन गजराज भी फंस गए और बड़ी मुश्किल से निकले।" यह दिखाता है कि कैसे मानवीय गतिविधियों ने वन्यजीवों के लिए भी रोजमर्रा की जिंदगी में चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। हाथी को भी अपने रास्ते से निकलने के लिए इंसानों द्वारा बनाए गए जाम में फंसना पड़ा, जो वन्यजीवों के लिए लगातार बढ़ती मुश्किलों को उजागर करता है। वन्यजीवों के आवास पर अतिक्रमण की बढ़ती चिंता: एक गंभीर चेतावनी यह घटना केवल एक वायरल वीडियो या एक मनोरंजक क्लिप नहीं है, बल्कि यह वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों जैसे बड़े और संवेदनशील जीवों के प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते मानवीय अतिक्रमण की एक गंभीर तस्वीर भी पेश करती है। जैसे-जैसे शहरीकरण, औद्योगिक विकास और सड़क परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है, हाथियों के सदियों पुराने प्राकृतिक गलियारे बाधित हो रहे हैं। इन गलियारों के कटने या सिकुड़ने के कारण, हाथी अक्सर अनजाने में मानव बस्तियों और व्यस्त सड़कों पर आ जाते हैं। यह न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ाता है, जिसमें दोनों पक्षों को नुकसान होता है, बल्कि हाथियों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है, क्योंकि वे वाहनों की चपेट में आ सकते हैं या अवैध शिकारियों का निशाना बन सकते हैं। इस तरह की घटनाएं अधिकारियों और आम जनता दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि हमें विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की आवश्यकता है। वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखना, उनके आवासों का सम्मान करना और सतत विकास मॉडल अपनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि गजराज जैसे वन्यजीव अपने प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से रह सकें। तभी ऐसी अप्रत्याशित घटनाएं कम होंगी और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की संभावना बढ़ेगी। इस वीडियो ने निश्चित रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है और एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दे पर बहस छेड़ दी है, जो भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है।

हरिद्वार में ‘गजराज’ का ट्रैफिक मैनेजमेंट! जाम खुलवाने पहुंचा हाथी, वायरल वीडियो ने बटोरी सुर्खियां

हरिद्वार, 10 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – (गजराज )आमतौर पर सड़कों पर वाहनों का लंबा जाम खुलवाने का जिम्मा ट्रैफिक पुलिस के जवानों का होता है, लेकिन उत्तराखंड के हरिद्वार में रविवार को एक ऐसा अनोखा और अविस्मरणीय नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां वाहनों की लंबी…

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उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत देहरादून, 09 जून, 2025 (समय बोल रहा ) उत्तराखंड की त्रिस्तरीय पंचायतों (हरिद्वार को छोड़कर) में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव आया है। पूर्व में नियुक्त प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने और जुलाई में प्रस्तावित चुनावों में देरी के कारण, राज्य सरकार ने पंचायतों के सुचारू संचालन के लिए नए प्रशासकों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। अब जिला पंचायतों की कमान जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट संभालेंगे, क्षेत्र पंचायतों का जिम्मा उपजिलाधिकारी देखेंगे, और ग्राम पंचायतों में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) प्रशासक होंगे। यह निर्णय तब लिया गया है जब वर्ष 2019 में गठित पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और नए चुनाव अभी संभव नहीं हो सके हैं। इस बदलाव का सीधा असर प्रदेश की लाखों ग्रामीण जनता पर पड़ेगा। कार्यकाल समाप्ति और चुनाव में देरी: क्यों पड़ी प्रशासकों की जरूरत? उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम-2016 की धारा-130 (6) के तहत, वर्ष 2019 में गठित प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों (जनपद हरिद्वार को छोड़कर) का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इन पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, शासन ने पूर्व में अधिसूचना संख्या-256316/XII(1)/2024-86(15)/2013/ई-68985 दिनांक 26.11.2024 और अन्य संबंधित अधिसूचनाओं के माध्यम से ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों के लिए प्रशासकों की नियुक्ति का अधिकार संबंधित जिलाधिकारियों को दिया था। ये प्रशासक कार्यकाल समाप्ति की तिथि से छह महीने तक या नई पंचायतों के गठन तक, जो भी पहले हो, के लिए नियुक्त किए गए थे। हालांकि, इन नियुक्त प्रशासकों का कार्यकाल भी अब समाप्त हो चुका है। ग्राम पंचायतों में 27 मई 2025 को, क्षेत्र पंचायतों में 29 मई 2025 को, और जिला पंचायतों में 01 जून 2025 को कार्यकाल समाप्त हो गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि "अति अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण" त्रिस्तरीय पंचायतों का सामान्य निर्वाचन, प्रशासकों के कार्यकाल समाप्ति की तिथि से पूर्व कराया जाना साध्य नहीं हो सका है। इसी अप्रत्याशित देरी के कारण, अब नई अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। नई प्रशासकीय व्यवस्था: कौन संभालेगा किसकी कमान? वर्तमान की "अपरिहार्य परिस्थिति" को देखते हुए, प्रदेश में जुलाई 2025 में प्रस्तावित आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (हरिद्वार को छोड़कर) प्रक्रिया संपन्न होने तक या नवीन पंचायतों के गठन तक, अथवा 31 जुलाई 2025 (जो भी पहले हो) तक, कार्यहित, जनहित और पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए नए अधिकारियों को प्रशासक के रूप में अधिकृत किया गया है। यह निर्णय प्रमोद कुमार बिजलवान, समीक्षा अधिकारी, पंचायती राज विभाग द्वारा 09/06/2025 को जारी अधिसूचना (संख्या: 305002 जैनराज बिंदु-1 /XII(1)/2025/86(15)/2013/ई-68985) में विस्तृत रूप से बताया गया है। नई व्यवस्था के तहत, निम्नवत् अधिकारियों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है: जिला पंचायतों में: संबंधित जिलाधिकारी / जिला मजिस्ट्रेट को जिला पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह दिखाता है कि जिला स्तर पर शासन ने सबसे उच्च अधिकारी पर भरोसा जताया है ताकि विकास कार्य और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे। क्षेत्र पंचायतों में: संबंधित उपजिलाधिकारी (अपनी क्षेत्राधिकारिता में) क्षेत्र पंचायतों का कार्यभार संभालेंगे। उपजिलाधिकारी की नियुक्ति से ब्लॉक स्तर पर प्रभावी निगरानी और निर्णय लेने की क्षमता बनी रहेगी। ग्राम पंचायतों में: संबंधित विकासखंड में तैनात सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह पद ग्रामीण स्तर पर सीधे जनता से जुड़ा होता है और योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि चुनावी प्रक्रिया पूरी होने और नई निर्वाचित पंचायतों के गठन तक ग्रामीण विकास कार्य और जन सेवाएं बाधित न हों। पुरानी शर्तों का यथावत् रहना और आगे की राह अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों (हरिद्वार को छोड़कर) में प्रशासक नियुक्त किए जाने संबंधी प्रस्तर-1 में उल्लिखित पूर्व निर्गत अधिसूचनाओं में निहित शेष शर्ते यथावत रहेंगी। इसका अर्थ है कि प्रशासकों के अधिकार और जिम्मेदारियां पूर्व में निर्धारित नियमों के अनुरूप ही होंगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था के सुचारू संचालन की आवश्यकता है। हरिद्वार जिले को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है, संभवतः वहां की चुनावी या प्रशासनिक स्थिति अलग होने के कारण। अब सभी की निगाहें जुलाई 2025 में होने वाले प्रस्तावित पंचायत चुनावों पर टिकी हैं, जो नई निर्वाचित पंचायतों को सत्ता में लाएंगे और ग्रामीण स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से स्थापित करेंगे। इस बीच, नए प्रशासक जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने और विकास कार्यों को गति देने की चुनौती का सामना करेंगे।

उत्तराखंड में ‘प्रशासक राज’ का नया दौर: पंचायतों में बड़े बदलाव, अब ये अधिकारी संभालेंगे कमान! जानिए पूरी खबर

देहरादून, 09 जून, 2025 (समय बोल रहा ) उत्तराखंड की त्रिस्तरीय पंचायतों (हरिद्वार को छोड़कर) में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव आया है। पूर्व में नियुक्त प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने और जुलाई में प्रस्तावित चुनावों में देरी के कारण, राज्य सरकार ने पंचायतों के सुचारू संचालन के लिए नए प्रशासकों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी…

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देशभक्ति की प्रचंड भावना और गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का एक अनूठा संगम काशीपुर में होने जा रहा है। आगामी 11 और 12 जून 2025 को ए.एन.झा इंटर कॉलेज, करनपुर में एक भव्य "शौर्य सम्मान समारोह" का आयोजन किया जा रहा है। यह दो दिवसीय कार्यक्रम राष्ट्रप्रेम, सैन्य सम्मान और आध्यात्मिक जागरूकता के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम बनेगा, जिसमें स्थानीय नागरिकों, युवाओं और महिलाओं की व्यापक भागीदारी की उम्मीद है। यह आयोजन न केवल हमारे वीर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेगा, बल्कि समाज में देशभक्ति और आध्यात्मिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगा। 11 जून 2025: तिरंगा यात्रा व कलश यात्रा - देशभक्ति का उद्घोष "शौर्य सम्मान समारोह" का आगाज 11 जून 2025 को एक भव्य तिरंगा यात्रा और कलश यात्रा के साथ होगा। यह यात्रा प्रातः 7 बजे श्री हरिकृपा धाम आश्रम, गढ़ीनेगी से शुरू होकर ए.एन.झा इंटर कॉलेज, करनपुर तक निकाली जाएगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाना और देश के गौरवशाली इतिहास तथा वीर सपूतों के बलिदान को याद करना है। इस यात्रा में महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु सहित आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में देशभक्त नागरिक, युवाओं और महिलाओं की सहभागिता अपेक्षित है। तिरंगे झंडों और कलशों के साथ निकलने वाली यह यात्रा निश्चित रूप से एक प्रेरणादायक और भावुक कर देने वाला दृश्य होगा। यह यात्रा न केवल क्षेत्र में देशभक्ति का माहौल बनाएगी, बल्कि आगामी मुख्य समारोह के लिए भी एक मजबूत नींव रखेगी, जिससे यह संदेश जाएगा कि समाज अपने सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। 12 जून 2025: शौर्य सम्मान समारोह - वीर सैनिकों को राष्ट्र का नमन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण, "शौर्य सम्मान समारोह", 12 जून 2025 को आयोजित किया जाएगा। प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलने वाले इस समारोह में देश की सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों का सम्मान किया जाएगा। यह हमारे उन जांबाज जवानों को श्रद्धांजलि देने और उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक मंच होगा, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी या निस्वार्थ भाव से सेवा की। इस समारोह में सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों, वीर नारियों, और अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति अपेक्षित है, जो अपने अनुभवों से युवाओं को प्रेरणा देंगे। सैनिक सम्मान समारोह के बाद, दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। यह भंडारा न केवल भोजन प्रदान करेगा, बल्कि सभी उपस्थित लोगों के बीच सद्भाव और एकता की भावना को भी बढ़ावा देगा, जिससे यह आयोजन एक सामूहिक पर्व का रूप ले सके। महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु जी के सानिध्य में ज्ञान की वर्षा: शौर्य सम्मान समारोह का आध्यात्मिक पहलू "शौर्य सम्मान समारोह" को आध्यात्मिक गहराई प्रदान करने के लिए, 9 से 11 जून तक, हर संध्या 3 बजे से 5 बजे तक विशेष दिव्य प्रवचनों का आयोजन किया जाएगा। ये प्रवचन श्री हरिकृपा पीठाधीश्वर स्वामी श्री हरि चैतन्य महाप्रभु जी द्वारा दिए जाएंगे। उनके प्रवचनों में आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति की सरिता बहेगी, जो श्रोताओं को आत्मिक शांति और जीवन के उच्च मूल्यों की ओर प्रेरित करेगी। ये प्रवचन न केवल देशभक्ति की भावना को आध्यात्मिकता से जोड़ेंगे, बल्कि उपस्थित लोगों को मानसिक और आत्मिक रूप से भी सशक्त करेंगे। स्वामी जी के प्रवचन जीवन के उद्देश्य, शांति, प्रेम और सेवा के महत्व पर केंद्रित होंगे, जो इस संपूर्ण आयोजन को एक समग्र और सार्थक आयाम प्रदान करेंगे। देशभक्ति के साथ आध्यात्म का यह संगम कार्यक्रम को एक अनूठा और गहरा महत्व प्रदान करेगा। कार्यक्रम स्थल और आयोजक का संदेश यह भव्य कार्यक्रम ए.एन.झा इंटर कॉलेज, करनपुर, काशीपुर (उधम सिंह नगर), उत्तराखंड में आयोजित किया जा रहा है। यह स्थल सभी के लिए सुविधाजनक होगा और बड़ी संख्या में लोगों को समायोजित करने में सक्षम होगा। आयोजकों ने इस कार्यक्रम को "राष्ट्रप्रेम, सैन्य सम्मान और आध्यात्मिक जागरूकता का अनूठा संगम" बताया है। उनका लक्ष्य है कि यह समारोह केवल एक आयोजन बनकर न रह जाए, बल्कि यह समाज में देशभक्ति की भावना को जागृत करे, सैनिकों के प्रति सम्मान को बढ़ाए और लोगों को आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध करे। ऐसे आयोजन हमारे समाज के ताने-बाने को मजबूत करते हैं और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा दिखाते हैं।

महाराज श्री हरि चैतन्य महाप्रभु के सानिध्य में काशीपुर के ग्राम करनपुर में देशभक्ति और आध्यात्म का अनूठा संगम: 11 जून को तिरंगा यात्रा, 12 जून को सैनिकों का सम्मान!

काशीपुर , 09 जून, 2025 (समय बोल रहा ) देशभक्ति और आध्यात्म की प्रचंड भावना और गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का एक अनूठा संगम काशीपुर में होने जा रहा है। आगामी 11 और 12 जून 2025 को ए.एन.झा इंटर कॉलेज, करनपुर में एक भव्य “शौर्य सम्मान समारोह” का आयोजन किया जा रहा है। यह दो दिवसीय…

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देहरादून, 07 जून, 2025 (समय बोल रहा) - उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत विवाह पंजीकरण को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण ऐलान किया है। अब राज्य में विवाह पंजीकरण 26 जुलाई, 2025 तक बिल्कुल निशुल्क होगा। यह आदेश शासन की ओर से शुक्रवार को ही जारी कर दिए गए हैं, जिससे नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस तय तारीख के बाद विवाह पंजीकरण के लिए शुल्क तो लगेगा ही, बल्कि कुछ मामलों में जुर्माना भी देना पड़ सकता है। यह कदम विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया को गति देने और अधिक से अधिक लोगों को समय रहते पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित करने हेतु उठाया गया है। निशुल्क पंजीकरण की अवधि और उसके बाद का शुल्क उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने और नागरिकों को सुविधा प्रदान करने के लिए विवाह पंजीकरण शुल्क को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। यह निलंबन 26 जुलाई, 2025 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान, जो भी विवाह यूसीसी के तहत पंजीकृत होते हैं, उनका पंजीकरण पूर्णतः निशुल्क होगा। रुड़की नगर निगम के नगर आयुक्त राकेश चंद तिवारी ने इस संबंध में पुष्टि करते हुए बताया कि यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण का शुल्क अब 26 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि के बीच जो भी विवाह पंजीकरण करता है, उसका यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण निशुल्क होगा। हालांकि, यदि कोई नागरिक यह पंजीकरण किसी सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) सेंटर के माध्यम से कराता है, तो उसे केवल सीएससी सेंटर को उनकी सेवा के लिए 50 रुपये का शुल्क देना होगा। यह शुल्क सरकारी पंजीकरण शुल्क से अलग है और सीएससी की सेवाओं के लिए देय होगा। 26 जुलाई के बाद नियम और जुर्माना: किसको देना होगा शुल्क और किसको जुर्माना? शासन की ओर से जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि 26 जुलाई, 2025 के बाद यदि कोई विवाह यूसीसी के तहत पंजीकृत किया जाता है, तो उस पर शुल्क के साथ-साथ जुर्माना भी लगेगा। यह नियम विशेष रूप से उन विवाहों पर लागू होगा जो 26 मार्च, 2010 के पश्चात संपन्न हुए हैं और जिनका पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है। मूल रूप से, समान नागरिक संहिता 27 जनवरी, 2025 को लागू की गई थी, जिसके तहत सभी विवाहित लोगों को अनिवार्य रूप से यूसीसी के अंतर्गत अपने विवाह का पंजीकरण करना था। पंजीकरण के लिए पहले 250 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया था। अब, 26 जुलाई के बाद यह 250 रुपये का शुल्क फिर से लागू हो जाएगा, और यदि विवाह 26 मार्च, 2010 के बाद हुआ है और उसका पंजीकरण तय समय सीमा में नहीं कराया गया है, तो उस पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह दंड उन लोगों के लिए है जिन्होंने पहले अनिवार्य पंजीकरण का पालन नहीं किया या अब समय सीमा के भीतर निशुल्क पंजीकरण का लाभ नहीं उठा रहे हैं। पूर्व में पंजीकृत विवाहों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश यह महत्वपूर्ण है कि यह आदेश केवल नए विवाहों के लिए ही नहीं है, बल्कि उन नागरिकों के लिए भी है जिन्होंने अपने विवाह को पहले ही किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत करवा लिया है। वे नागरिक जिन्होंने अपने विवाह को पहले ही उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण विधेयक, 2010 या किसी अन्य वैयक्तिक कानून (Personal Law) के अंतर्गत पंजीकृत करवा लिया है, उन्हें भी इस पंजीकरण की जानकारी अथवा 'एक्नॉलेजमेंट' (acknowledgment) समान नागरिक संहिता पोर्टल पर देना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया केवल सूचनात्मक है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी विवाहों का विवरण यूसीसी के केंद्रीय डेटाबेस में उपलब्ध हो। यह एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि यूसीसी के तहत सभी विवाहों का एक एकीकृत रिकॉर्ड बन सके और भविष्य में किसी भी तरह की विसंगति या कानूनी उलझन से बचा जा सके। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे इस जानकारी को यूसीसी पोर्टल पर अवश्य अपडेट करें। पंजीकरण की स्थिति और सरकार की अपील राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक समान नागरिक संहिता के तहत 1 लाख 90 हजार से अधिक विवाहों का सफलतापूर्वक ऑनलाइन पंजीकरण किया जा चुका है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि नागरिक इस नए कानून के प्रति जागरूक हैं और इसका पालन कर रहे हैं। राज्य सरकार नागरिकों से अपील करती है कि वे इस निशुल्क पंजीकरण की समय सीमा का अधिकतम लाभ उठाएं। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नागरिक 26 जुलाई तक का इंतजार न करें और जल्द से जल्द इस सुविधा का उपयोग करते हुए यूसीसी के अंतर्गत अपने विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करें। यह न केवल उन्हें शुल्क और जुर्माने से बचाएगा, बल्कि यूसीसी के सुचारु क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा, जिससे सभी के लिए समानता और एकरूपता की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ेगा।

उत्तराखंड UCC विवाह पंजीकरण: 26 जुलाई तक ‘फ्री’ रजिस्ट्रेशन, फिर लगेगा शुल्क और जुर्माना भी; तुरंत जानें पूरी प्रक्रिया!

देहरादून, 07 जून, 2025 (समय बोल रहा) – उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत विवाह पंजीकरण को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण ऐलान किया है। अब राज्य में विवाह पंजीकरण 26 जुलाई, 2025 तक बिल्कुल निशुल्क होगा। यह आदेश शासन की ओर से शुक्रवार को ही जारी कर दिए गए हैं, जिससे…

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देहरादून, 06 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - देवभूमि उत्तराखंड में पर्यटन सीजन चरम पर है, और राज्य के खूबसूरत पहाड़ों और धार्मिक स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। लेकिन इसी दौरान, कुछ पर्यटकों द्वारा सड़कों पर हुड़दंग करने, वाहनों में शराब पीकर उत्पात मचाने और अनधिकृत रूप से कारों में हूटर बजाने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। इन बढ़ती घटनाओं पर लगाम कसने के लिए, उत्तराखंड पुलिस ने अब कड़ा रुख अपनाया है। रेंज कार्यालय से एक विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत ऐसे अनुशासनहीन पर्यटकों को गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस का यह कदम राज्य की शांति व्यवस्था और पर्यटकों के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पर्यटन सीजन में अनुशासनहीनता: बढ़ती शिकायतें और वायरल वीडियो उत्तराखंड, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य रहा है। वर्तमान में, पर्यटन सीजन चरम पर है, और गढ़वाल मंडल के चारों धामों (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) से लेकर प्रमुख पर्यटक स्थलों जैसे देहरादून, मसूरी, धनोल्टी, चकराता, टिहरी, हर्षिल और अन्य स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए तो सुखद है, लेकिन इसी के साथ कुछ अप्रिय घटनाएं भी सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में, गढ़वाल के अलग-अलग जिलों से पर्यटकों के उत्पात मचाने, सार्वजनिक स्थानों पर मारपीट करने, और वाहनों से खतरनाक स्टंटबाजी करने की कई शिकायतें मिली हैं। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिससे राज्य की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ये वीडियो न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं, बल्कि अन्य पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए भी असहजता और भय का माहौल पैदा कर रहे हैं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए, पुलिस प्रशासन अब सख्त कार्रवाई करने को मजबूर हुआ है। पुलिस का 'जीरो टॉलरेंस' अभियान: हुड़दंगियों पर होगी कड़ी कार्रवाई इन बढ़ती शिकायतों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देखते हुए, रेंज कार्यालय ने अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत, एक विशेष अभियान शुरू किया गया है जिसका सीधा उद्देश्य उन पर्यटकों पर शिकंजा कसना है जो उत्तराखंड आकर कानून का उल्लंघन करते हैं और सार्वजनिक शांति भंग करते हैं। पुलिस अब सड़कों पर खुलेआम शराब पीने, वाहनों में शराब पीकर उत्पात मचाने, तेज संगीत बजाकर शोरगुल करने, और विशेष रूप से अनधिकृत रूप से कारों में हूटर या सायरन बजाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। पुलिस स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि पर्यटन का अर्थ अनुशासनहीनता या अराजकता नहीं है। राज्य में सभी का स्वागत है, लेकिन कानून का सम्मान करना अनिवार्य है। इस अभियान में उन व्यक्तियों को भी लक्ष्य किया जाएगा जो खतरनाक ड्राइविंग या स्टंटबाजी करके अपनी और दूसरों की जान खतरे में डालते हैं। अभियान के तहत गिरफ्तारी और कानूनी प्रावधान इस विशेष अभियान के दौरान, पुलिस टीम सादे कपड़ों में और यूनिफॉर्म में विभिन्न पर्यटक स्थलों और प्रमुख मार्गों पर तैनात रहेंगी। सीसीटीवी कैमरों और स्थानीय लोगों से मिली सूचनाओं के आधार पर भी कार्रवाई की जाएगी। जो भी पर्यटक इन गतिविधियों में संलिप्त पाए जाएंगे, उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) और मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज करेगी। शराब पीकर हंगामा करने पर आईपीसी की धाराओं के साथ-साथ आबकारी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। अनधिकृत रूप से हूटर या सायरन बजाने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माना और अन्य दंड का प्रावधान है। स्टंटबाजी या रैश ड्राइविंग के मामलों में न केवल भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है और गंभीर मामलों में कारावास की सजा भी हो सकती है। पुलिस का लक्ष्य इन सख्त कार्रवाइयों के माध्यम से एक मिसाल कायम करना है ताकि अन्य लोग ऐसी गलतियां करने से पहले सौ बार सोचें। स्थानीय निवासियों और अन्य पर्यटकों को मिलेगी राहत पुलिस के इस विशेष अभियान से स्थानीय निवासियों और अन्य शांतिप्रिय पर्यटकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हुड़दंग और उत्पात मचाने वाले तत्वों के कारण अक्सर स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और शांत वातावरण भंग होता है। इसके अलावा, जो पर्यटक शांति और प्रकृति का आनंद लेने आते हैं, उन्हें भी ऐसे अप्रिय व्यवहार के कारण असुविधा होती है। पुलिस के इस कदम से पर्यटन का वास्तविक अनुभव बेहतर होगा, और राज्य की छवि एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में मजबूत होगी। यह अभियान न केवल कानून का राज स्थापित करेगा, बल्कि पर्यटन के लिए एक अधिक सम्मानजनक और सुखद वातावरण भी बनाएगा, जिससे उत्तराखंड अपनी देवभूमि की पहचान को बरकरार रख सके। पुलिस ने सभी पर्यटकों से अपील की है कि वे राज्य के कानूनों का पालन करें और अपनी यात्रा को शांतिपूर्ण और सुखद बनाएं।

उत्तराखंड में हुड़दंगियों की खैर नहीं! सड़कों पर शराब पीकर उत्पात मचाने और हूटर बजाने वालों पर पुलिस सख्त, विशेष अभियान शुरू

देहरादून, 06 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – देवभूमि उत्तराखंड में पर्यटन सीजन चरम पर है, और राज्य के खूबसूरत पहाड़ों और धार्मिक स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। लेकिन इसी दौरान, कुछ पर्यटकों द्वारा सड़कों पर हुड़दंग करने, वाहनों में शराब पीकर उत्पात मचाने और अनधिकृत रूप से कारों में…

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काशीपुर, 05 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - काशीपुर पुलिस ने अवैध हथियारों के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखते हुए एक और सफलता हासिल की है। बुधवार देर रात गश्त पर निकली कोतवाली पुलिस टीम ने एक संदिग्ध युवक को 315 बोर के तमंचे के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुलवंत सिंह उर्फ काली के रूप में हुई है, जिसने पुलिस पूछताछ में तमंचा रखने का अजीबोगरीब बहाना बताया कि वह जंगल में लकड़ियां काटने जाता है, इसलिए उसने अपनी सुरक्षा के लिए तमंचा रखा था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है, जो अवैध हथियार रखने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करता है। देर रात की गश्त और संदिग्ध की धरपकड़: पुलिया के पास हुई गिरफ्तारी यह घटना बुधवार की देर रात की है, जब हल्का नंबर एक चौकी में तैनात उप-निरीक्षक (एसआई) देवेंद्र सिंह सामंत अपनी टीम के साथ क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे। पुलिस टीम का उद्देश्य क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नज़र रखना था। अपनी गश्त के दौरान, जब टीम मालधन नंबर 7 से पहले पड़ने वाली पुलिया के पास पहुंची, तो उनकी नज़र एक संदिग्ध युवक पर पड़ी। युवक की हरकतें सामान्य नहीं लग रही थीं और पुलिस को उस पर शक हुआ। तत्काल कार्रवाई करते हुए, एसआई देवेंद्र सिंह सामंत की टीम ने उस युवक को घेर लिया और उसे दबोच लिया। पुलिस ने युवक से पूछताछ की और उसकी तलाशी ली। तलाशी के दौरान, पुलिस के हाथ एक महत्वपूर्ण सफलता लगी। युवक के कब्जे से एक .315 बोर का तमंचा बरामद हुआ। यह एक खतरनाक हथियार है, जिसका इस्तेमाल गंभीर अपराधों में हो सकता है। तमंचा मिलते ही पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया और आगे की पूछताछ शुरू की। आरोपी की पहचान और चौंकाने वाला बहाना: "लकड़ी काटने के लिए रखा था तमंचा" पुलिस पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी ने अपनी पहचान 50 वर्षीय कुलवंत सिंह उर्फ काली पुत्र चरण सिंह के रूप में बताई, जो दुर्गापुर, थाना कुंडा का निवासी है। कुंडा थाना क्षेत्र भी उत्तराखंड से सटा हुआ है, जो अक्सर अपराधियों के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में भागने का रास्ता बन जाता है। जब पुलिस ने कुलवंत सिंह उर्फ काली से तमंचा रखने का कारण पूछा, तो उसने एक चौंकाने वाला और अविश्वसनीय बहाना बताया। उसने कहा कि वह जंगल में लकड़ियां काटने जाता है, और अपनी सुरक्षा के लिए उसने यह तमंचा रखा था। यह दलील आमतौर पर अवैध हथियार रखने वाले अपराधी देते हैं ताकि वे अपने कृत्य को वैध ठहरा सकें। हालांकि, कानून के तहत, हथियार रखने के लिए लाइसेंस आवश्यक होता है, और बिना लाइसेंस के तमंचा रखना एक गंभीर अपराध है। पुलिस इस बहाने को स्वीकार करने वाली नहीं थी और उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में कानून के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब इस बात की भी जांच करेगी कि क्या कुलवंत सिंह का कोई आपराधिक इतिहास है या उसका संबंध किसी आपराधिक गिरोह से है। आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज: कानून का शिकंजा पुलिस ने कुलवंत सिंह उर्फ काली के खिलाफ आर्म्स एक्ट (Arms Act) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। आर्म्स एक्ट भारत में अवैध हथियार रखने, बनाने या बेचने पर रोक लगाता है और इन अपराधों के लिए सख्त दंड का प्रावधान करता है। .315 बोर का तमंचा जैसे हथियार रखना, बिना लाइसेंस के, एक गैर-जमानती अपराध है और इसमें कारावास की सजा हो सकती है। मुकदमा दर्ज होने के बाद, आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कुलवंत सिंह यह तमंचा कहां से लाया था और क्या वह किसी बड़े हथियार तस्करी रैकेट का हिस्सा है। इस गिरफ्तारी से अवैध हथियारों के नेटवर्क पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है और शहर में अपराधों को रोकने में भी सहायता मिलेगी। पुलिस टीम की मुस्तैदी: शहर की सुरक्षा का जिम्मा इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में एसआई देवेंद्र सिंह सामंत के साथ अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल थे। उनकी सक्रिय गश्त और संदिग्धों पर नज़र रखने की क्षमता ने ही इस गिरफ्तारी को संभव बनाया। यह पुलिस टीम की मुस्तैदी और उनकी कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है, जो शहर में अवैध गतिविधियों को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। पुलिस का यह अभियान अवैध हथियारों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अपराधों को जन्म देते हैं और समाज में भय का माहौल बनाते हैं। ऐसे अभियानों से अपराधियों में पुलिस का खौफ बढ़ता है और आम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा होता है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि वह ऐसे अपराधि

काशीपुर में आर्म्स एक्ट का खुलासा: गश्त के दौरान 315 बोर के तमंचे के साथ युवक गिरफ्तार, जंगल में लकड़ी काटने का दिया बहाना

काशीपुर, 05 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – काशीपुर पुलिस ने अवैध हथियारों के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखते हुए एक और सफलता हासिल की है। बुधवार देर रात गश्त पर निकली कोतवाली पुलिस टीम ने एक संदिग्ध युवक को 315 बोर के तमंचे के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुलवंत सिंह…

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