डॉक्टरों के ट्रांसफर से मालधन में जनता का फूटा गुस्सा, ‘नशा नहीं, इलाज दो’ के नारों के साथ बाजार बंद कर किया विरोध प्रदर्शन

रामनगर/मालधन, 18 अगस्त 2025 – (समय बोल रहा ) – मालधन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और नशे के खिलाफ आज महिला एकता मंच के आह्वान पर एक ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। सोमवार को पूरे दिन मालधन का बाजार पूरी तरह से बंद रहा। “नशा नहीं, इलाज दो” के जोरदार नारों के साथ इस बंद को क्षेत्र की 40,000 से अधिक आबादी का अभूतपूर्व समर्थन मिला। मेडिकल स्टोर, हलवाई, दूध व्यवसायी, खोखा और फुटपाथ दुकानदार सहित सभी ने अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन को अपनी ताकत दी।
सड़कों पर उतरी महिलाएं और ग्रामीण
सुबह 7 बजे से ही महिलाएँ और आम नागरिक बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। विरोध का यह सिलसिला दिन भर चला और दोपहर 1 बजे एक विशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस मालधन के मुख्य चौराहे पर आकर एक बड़े धरने में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली के साथ-साथ क्षेत्र में नशे पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों ने सरकार और प्रशासन के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
- डॉक्टरों की तत्काल वापसी: मालधन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से स्थानांतरित किए गए फिजिशियन डॉ. प्रशांत कौशिक और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना कौशिक का ट्रांसफर रद्द किया जाए, या उनकी जगह अन्य डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की जाए।
- स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेडियोलॉजिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के साथ एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, प्रसव और ऑपरेशन जैसी सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध कराई जाएं।
- नशे पर लगाम: क्षेत्र में नई खोली गई शराब की दुकानों को बंद किया जाए और अवैध एवं कच्ची शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया जाए।
सरकार पर हमला और ‘नशे की मंडी’ बनाने का आरोप
सभा को संबोधित करते हुए महिला एकता मंच की भगवती आर्य ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकार ने डॉक्टरों का ट्रांसफर कर 40 हजार की आबादी को मौत के मुंह में धकेल दिया है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि “दुर्घटना या प्रसव जैसी स्थिति में पहला घंटा जीवन बचाने के लिए ‘गोल्डन आवर’ होता है, और अगर इलाज न मिले तो मौत तय है, चाहे व्यक्ति कितना भी अमीर क्यों न हो।”
ममता नामक एक अन्य सदस्य ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि “इलाज देने की बजाय सरकार शराब पिलाने में जुटी है।” उन्होंने सरकार पर मालधन को ‘नशे की मंडी’ बनाने का आरोप लगाया और गोपाल नगर में नई खोली गई शराब की दुकान को तुरंत बंद करने की मांग की।
आंदोलन को तेज करने की चेतावनी
महिला एकता मंच ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द ही पूरा नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगी। उन्होंने कहा कि वे भाजपा नेताओं का थाली-कनस्तर बजाकर घेराव करेंगी और क्षेत्र में अनिश्चितकालीन चक्का जाम भी करेंगी।
विभिन्न संगठनों का मिला समर्थन
मालधन के इस ऐतिहासिक आंदोलन को विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिला है। धरना-प्रदर्शन और जुलूस में प्रगतिशील महिला एकता मंच की तुलसी छिम्वाल, ग्राम प्रधान चन्द्रनगर जगमोहन, ग्राम प्रधान गोपालनगर संजीव, किसान संघर्ष समिति के ललित उप्रेती, महेश जोशी, समाजवादी लोकमंच के मुनीष कुमार, सुरेश चन्द्र खंतवाल और युवा एकता मंच के इंद्रजीत सहित कई संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया, जिससे आंदोलन को एक व्यापक आधार मिला। यह एकजुटता दर्शाती है कि स्वास्थ्य और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर पूरा क्षेत्र एक साथ खड़ा है।
जनता की उम्मीद और सरकार की जिम्मेदारी
मालधन में हुए इस विशाल प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब केवल वादों पर शांत नहीं बैठेगी। डॉक्टरों की वापसी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग के साथ-साथ नशे पर रोक की मांग ने इस आंदोलन को एक बहुआयामी रूप दिया है। अब यह सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे जनता की मांगों को सुनें और इस गंभीर समस्या का समाधान निकालें। यह देखना बाकी है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।