चिन्हीकरण की मांग को लेकर काशीपुर में वंचित राज्य आन्दोलनकारियों का धरना प्रदर्शन जारी
आन्दोलनकारियों ने सरकार पर उदासी रवैया अपनाने और जनप्रतिनिधियों पर पैरवी न करने का लगाया आरोप
काशीपुर 08 नवंबर 2025( समय बोल रहा) – राज्य निर्माण सक्रिय आन्दोलनकारियों और वंचित राज्य निर्माण आन्दोलनकारी परिषद के बैनर तले आज दूसरे दिन भी उपजिलाधिकारी कार्यालय, काशीपुर के बाहर धरना प्रदर्शन जारी रहा। आन्दोलनकारियों ने खटीमा की तर्ज पर चिन्हीकरण कर सम्मान पत्र प्रदान किए जाने की मांग को लेकर शासन-प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
धरने पर बैठे आन्दोलनकारियों ने सरकार के उदासीन रवैये पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक ओर खटीमा में स्थानीय विधायक द्वारा अब तक 850 आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण की मांग विधानसभा में उठाई जा रही है, वहीं काशीपुर के विधायक और मेयर जैसे जनप्रतिनिधि वंचित आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण की पैरवी करते नज़र नहीं आ रहे हैं, जो बेहद निराशाजनक है।
2005 से लगातार मांग, समय बढ़ाने पर विरोध
राज्य निर्माण सक्रिय आन्दोलनकारी के प्रदेश संयोजक विनय विश्नोई ने स्थानीय नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि घोषित आन्दोलनकारियों के पास अपने उन साथियों से मिलने तक का समय नहीं है, जो राज्य आन्दोलन में उनके साथ थे। उन्होंने बताया कि यह मांग वर्ष 2005 से निरन्तर उठाई जा रही है, लेकिन सरकार हर बार समय में वृद्धि कर देती है। हाल ही में सरकार ने एक बार फिर चिन्हीकरण के लिए छह माह का समय बढ़ा दिया है।
मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
धरने पर बैठे आन्दोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि चिन्हीकरण की मांग पूरी न होने पर वे शीघ्र ही उग्र आन्दोलन छेड़ने को बाध्य होंगे। वक्ताओं ने इसे एक ‘शर्मनाक विषय’ बताया कि नए बने राज्यों में कहीं भी राज्य निर्माण आन्दोलनकारियों को अपने मान-सम्मान के लिए भीख मांगनी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि काशीपुर के वंचित आन्दोलनकारियों का चिन्हीकरण शीघ्र किया जाए।
धरने पर प्रदेश संयोजक विनय विश्नोई के साथ अनुराग सारस्वत, डा0 आशा राम, अर्चना लोहनी, युगल किशोर सिंघल, विद्यार्थी भैया, सनत पैगिया, उमेश जोशी, विरेन्द्र शर्मा, अजय अग्रवाल, सुशील विक्की, प्रदीप कुमार, मदन सिंह, गोपाल बाबू रस्तोगी, मोहन सिंह बिष्ट, मीनू गुप्ता, राजेन्द्र सैनी, अरूण पन्त सहित दर्जनों सक्रिय आन्दोलनकारी मौजूद रहे।

