कल्याणी नदी पर प्रशासन का बड़ा एक्शनऔद्योगिक इकाइयों के एसटीपी–ईटीपी की जमीनी जांच, बिना ट्रीटमेंट पानी छोड़ा तो होगी कड़ी कार्रवाई

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रुद्रपुर | 08 जनवरी 2026 | समय बोल रहा

कल्याणी नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।

इसी क्रम में सिडकुल पंतनगर क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाइयों के एसटीपी और ईटीपी प्लांट्स का स्थलीय निरीक्षण किया गया।जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने मौके पर ही नदी के पानी के सैम्पल भरवाकर प्रयोगशाला जांच के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी औद्योगिक इकाई द्वारा बिना ट्रीटमेंट औद्योगिक जल को कल्याणी नदी या अन्य जलस्रोतों में छोड़ा गया, तो संबंधित इकाई के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।जांच रिपोर्ट में देरी पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर नाराज़गीनिरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों पर कड़ी नाराज़गी जताई।

उन्होंने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में सीईटीपी/ईटीपी लाइन की स्थापना और दूषित जल निस्तारण से संबंधित जांच रिपोर्ट पहले ही मांगी जा चुकी थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी औद्योगिक इकाइयों में—ईएसटीपी/ईटीपी की वास्तविक स्थितिट्रीटमेंट के बाद रासायनिक जल के निस्तारण की प्रक्रियासे संबंधित स्पष्ट, तथ्यात्मक और लिखित जांच रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए।सिडकुल क्षेत्र में गंदगी पर नगर निगम को फटकारसिडकुल डायल के पास क्षेत्र में जगह-जगह कूड़ा और गंदगी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराज़गी व्यक्त की।उन्होंने नगर आयुक्त को तत्काल सफाई कराने तथा आरएम सिडकुल को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

कल्याणी नदी के हर चरण से होगी पानी की वैज्ञानिक जांचजिलाधिकारी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित किया कि कल्याणी नदी के—उद्गम स्थल पत्थरचट्टासिडकुल का प्रारंभिक क्षेत्रसिडकुल का अंतिम बिंदु अटरिया पुलतथा शहर के अंतिम छोर यूपी बॉर्डरसे पानी के सैम्पल लेकर वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए, ताकि प्रदूषण के स्रोत और स्तर की स्पष्ट पहचान हो सके।

निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे अधिकारीनिरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, कौस्तुभ मिश्र, उप जिलाधिकारी गौरव पाण्डेय, नगर आयुक्त शिप्रा जोशी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एस.पी. सिंह, तहसीलदार दिनेश कुटौला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

समय बोल रहा | विश्लेषण

कल्याणी नदी को लेकर सवाल अब केवल औद्योगिक इकाइयों तक सीमित नहीं हैं।निगरानी व्यवस्था, समय पर जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।अब देखने वाली बात यह होगी कि यह सख्ती सिर्फ निरीक्षण तक सीमित रहती है या वास्तव में कल्याणी नदी को प्रदूषण से राहत मिलती है।

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