किसान सुखवंत सिंह मौत मामला: सरकार का बड़ा एक्शन; SHO और दो दरोगा समेत कई पुलिसकर्मी निलंबित
परिजनों की मांगें मानी: वीडियो के आधार पर FIR और गिरफ्तारी शुरू, कुमाऊं कमिश्नर करेंगे पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच
काशीपुर, 12 जनवरी 2026 (समय बोल रहा) – किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद सरकार और प्रशासन ने झुकते हुए बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। परिजनों और सिख समाज के भारी आक्रोश के बाद शासन ने मृतक किसान के वीडियो को मुख्य साक्ष्य मानते हुए इसमें नामजद सभी दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के आदेश दे दिए हैं।
पुलिस महकमे में बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक
इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक संवेदनहीनता और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन स्तर से मिली जानकारी के अनुसार:
- SHO और दो दरोगा निलंबित: संबंधित थाना प्रभारी (SHO) और पेगा चौकी के दो दरोगाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- पुलिसकर्मियों पर गाज: चौकी के कई अन्य पुलिसकर्मियों को भी ड्यूटी में लापरवाही और संदिग्ध भूमिका के चलते सस्पेंड कर दिया गया है।
कुमाऊं कमिश्नर को सौंपी गई जांच
मामले की निष्पक्षता और गंभीरता को देखते हुए नैनीताल कुमाऊं मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। शासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
परिजनों की मांग
किसान के परिवार को 3 करोड़ 80 लाख रुपये में से 25 प्रतिशत राशि तत्काल दे दी गई है। हालांकि, मृतक के पिता और परिजनों ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं है। प्रशासन ने 19 जनवरी तक दोषियों पर पूर्ण कार्रवाई और शेष राशि लौटाने का आश्वासन दिया है, लेकिन परिवार का कहना है कि अगर समय पर न्याय मिलता, तो सुखवंत को यह कदम नहीं उठाना पड़ता।
नानकमत्ता कमेटी पर उठे सवाल: इस्तीफे की मांग तेज
इस मामले में नानकमत्ता कमेटी के सदस्य सुखवंत सिंह पन्नू की भूमिका पर भी सिख समाज ने कड़ा ऐतराज जताया है। समाज के लोगों ने कहा कि एक सिख का दूसरे सिख के साथ अन्याय करना शर्मनाक है। पन्नू के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही है। लोगों का कहना है कि कमेटी सदस्य को किसान की ढाल बनना चाहिए था, न कि आरोपों के घेरे में आना चाहिए था।
जनता का सवाल: क्या सिर्फ निलंबन काफी है?
इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जनता के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोषी अधिकारियों को सिर्फ निलंबित कर देना पर्याप्त है? क्या ऐसे अधिकारियों की सेवाएं हमेशा के लिए समाप्त नहीं होनी चाहिए?
यह मामला केवल एक किसान की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। यदि 19 जनवरी तक प्रशासन अपने वादों पर खरा नहीं उतरता है, तो यह आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

