budget 2026 expectations highlights india inc wants bold reforms from nirmala sitharaman co to fuel next growth cycle

बजट 2026-27: किस सेक्टर को कितना मिला? सरकार का पूरा खर्च प्लान सामने देखे

नई दिल्ली 01 फरवरी 2026 (समय बोल रहा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश कर दिया है। इस बार का बजट साफ संकेत देता है कि सरकार ने लोकलुभावन घोषणाओं की बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दी है। आम करदाताओं को टैक्स में बड़ी राहत नहीं…

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UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 2012 के नियम ही रहेंगे लागू

दिल्ली | 29 जनवरी 2026 | समय बोल रहा सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए और विवादित नियमों पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार करते हुए गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि नए नियमों में अस्पष्टता है और उनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी…

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सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा में उठाया सवाल — उत्तराखंड को जल जीवन मिशन का बजट अब तक जारी क्यों नहीं?

नई दिल्ली/उत्तराखंड 5 दिसम्बर 2025 (समय बोल रहा) पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और नैनीताल–उधम सिंह नगर से सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा में उत्तराखंड की ग्रामीण पेयजल योजनाओं को लेकर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से पूछा कि जल जीवन मिशन के तहत उत्तराखंड को वर्ष 2024–25 का बजट अभी…

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निरंकार से जुड़कर ही हो पाएगा आत्ममंथन: निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज काशीपुर/दिल्ली, 01 अक्तूबर, 2025 – (रिपोर्ट: समय बोल रहा ) – मानवता की निस्वार्थ सेवा और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देने वाले संत निरंकारी मिशन के 78वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य शुभारम्भ , 31 अक्तूबर को सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं आदरणीय निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में हुआ। 3 नवंबर तक चलने वाले इस चार-दिवसीय समागम में पूरे भारतवर्ष एवं विदेशों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्त सम्मिलित होकर दिव्य आनंद की अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। आत्ममंथन: भीतर की यात्रा का पावन संदेश समागम के पहले दिन, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने मानवता के नाम अपना पावन संदेश देते हुए आत्ममंथन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने फरमाया, ‘‘आत्ममंथन एक भीतर की यात्रा है। इसे केवल चंचल मन और बुद्धि के स्तर पर नहीं तय किया जा सकता। इसके लिए अपने अंदर आध्यात्मिक रूप में मंथन करने की जरूरत है।’’ सतगुरु माता जी ने आगे समझाया कि हर मानव के अंदर और बाहर एक स्थिर और शाश्वत सत्य (निरंकार) निवास करता है। जब मनुष्य पहले इस सत्य को जान लेता है, तभी उसके मन में सबके प्रति प्रेम का भाव उत्पन्न हो पाता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को प्रेम भाव की प्राथमिकता के साथ बनाया है, लेकिन अज्ञानता के कारण वह एक-दूसरे से नफ़रत करने के कारण ढूंढ लेता है। अंत में, सतगुरु माता जी ने पूरे संसार के लिए यही शुभ कामना की कि मनुष्य मानवता की राह पर चले, अंदर से खुद का सुधार करते चले जाएं ताकि सुधार का दायरा बढ़ते हुए पुरे संसार में अमन एवं भाईचारे का वातावरण स्थापित हो सके। भव्य शोभायात्रा और दिव्य स्वागत समागम स्थल पर आगमन होते ही, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी का स्वागत मिशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा किया गया। सतगुरु माता जी का स्वागत: संत निरंकारी मण्डल की प्रधान श्रीमती राजकुमारी जी ने फूलों की माला पहनाकर और मण्डल की सचिव डॉक्टर प्रवीण खुल्लर जी ने फूलों का गुलदस्ता भेंट करके किया। निरंकारी राजपिता जी का स्वागत: संत निरंकारी मण्डल के सीनियर एक्जिक्युटिव मेंबर अशोक मनचंदा जी ने फूलों की माला पहनाकर और विदेश विभाग के मेंबर इंचार्ज श्री विनोद वोहरा जी ने फूलों का गुलदस्ता भेंट करके किया। इसके बाद, इस दिव्य युगल को एक फूलों से सुसज्जित खुली पालकी में विराजमान कर एक भव्य शोभा यात्रा के रूप में समागम पंडाल के मध्य से मुख्य मंच तक ले जाया गया। कला और भक्ति का अनुपम संगम मुख्य मंच पर पहुँचते ही सतगुरु माता जी एवं निरंकारी राजपिता जी का स्वागत निरंकारी इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड आर्ट्स (NIMA) के 2500 से भी अधिक छात्रों ने किया। छात्रों ने भरत नाट्यम एवं स्वागती गीत द्वारा अपनी श्रद्धा अर्पित की। पंडाल में उपस्थित लाखों श्रद्धालु भक्तों की नयनों से आनंद की धाराएं बह रही थीं। विभिन्न संस्कृतियों के भक्त अपनी जाति, धर्म, और भाषा को भुलाकर केवल प्रेमाभक्ति में सराबोर थे। दिव्यता का यह अनुपम नज़ारा प्रेमा भक्ति की अनुभूति से सराबोर था।

‘आत्ममंथन’ की दिव्य झलक बिखेरते हुए 78वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य शुभारम्भ

निरंकार से जुड़कर ही हो पाएगा आत्ममंथन: निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज काशीपुर/दिल्ली, 01 अक्तूबर, 2025 – (रिपोर्ट: समय बोल रहा ) – मानवता की निस्वार्थ सेवा और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देने वाले संत निरंकारी मिशन के 78वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य शुभारम्भ , 31 अक्तूबर को सतगुरु माता सुदीक्षा जी…

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ग्रेटर नोएडा, 13 सितंबर 2025 - ( समय बोल रहा ) - ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ऐस सिटी सोसाइटी शनिवार को उस समय सदमे में डूब गई जब एक मां और उसके 11 साल के बेटे ने 13वीं मंजिल से छलांग लगा दी। इस दर्दनाक घटना में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान 37 वर्षीय साक्षी चावला और उनके बेटे दक्ष चावला के रूप में हुई है। इस घटना ने पूरे सोसाइटी परिसर में मातम और हैरानी का माहौल बना दिया है। क्या हुआ पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, यह दुखद घटना सुबह करीब 9 बजे हुई। साक्षी के पति दर्पण चावला ने उन्हें बेटे को दवा देने के लिए कहा था। दवा देने के बाद साक्षी बेटे को बालकनी में टहलाने लगीं और कुछ ही देर में दोनों ने 13वीं मंजिल से छलांग लगा दी। सोसाइटी के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घटना के बाद पूरे परिवार और सोसाइटी में मातम का माहौल है। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक पड़ोसियों और परिवार के करीबी लोगों ने पुलिस को बताया कि साक्षी लंबे समय से तनाव में थीं। वह अक्सर कहती थीं कि उनकी जिंदगी बहुत कठिन हो गई है। उनके बेटे दक्ष की मानसिक हालत ठीक नहीं थी और उसका लंबे समय से इलाज चल रहा था। वह स्कूल भी नहीं जाता था और पूरी तरह से दवाइयों पर निर्भर था। बेटे की बीमारी और इलाज में कोई सुधार न होने से साक्षी लगातार मानसिक दबाव और परेशानी झेल रही थीं, जिसे इस दुखद कदम की वजह माना जा रहा है। पुलिस की जांच जारी पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसे साक्षी ने अपने पति दर्पण चावला के नाम लिखा था। इस नोट में उन्होंने लिखा है, "हम दुनिया छोड़ रहे हैं… सॉरी। हम तुम्हें अब और परेशान नहीं करना चाहते। हमारी वजह से तुम्हारी जिंदगी खराब न हो। हमारी मौत का जिम्मेदार कोई नहीं है।" एडीसीपी सेंट्रल नोएडा शैव्या गोयल ने बताया कि सुसाइड नोट की लिखावट की जांच के लिए हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स को भेजा गया है। इसके अलावा, पुलिस मामले की जांच हर पहलू से कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं इसके पीछे कोई और वजह तो नहीं है। यह परिवार मूल रूप से उत्तराखंड के नगर पंचायत गढ़ी नेगी का निवासी है। फिलहाल, वे ऐस सिटी सोसाइटी के फ्लैट नंबर E-1309 में रह रहे थे। इस घटना ने पूरे इलाके में एक गहरा सदमा और दुख का माहौल बना दिया है।

ग्रेटर नोएडा में हादसा: उत्तराखंड के नगर पंचायत गढ़ीनेगी के मां-बेटे की मौत

ग्रेटर नोएडा, 13 सितंबर 2025 – ( समय बोल रहा ) – ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ऐस सिटी सोसाइटी शनिवार को उस समय सदमे में डूब गई जब एक मां और उसके 11 साल के बेटे ने 13वीं मंजिल से छलांग लगा दी। इस दर्दनाक घटना में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।…

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नई दिल्ली, 09 सितंबर 2025 – (समय बोल रहा ) – आज के उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने एक निर्णायक जीत हासिल कर देश के अगले उपराष्ट्रपति का पद संभाल लिया है। इस चुनाव में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को बड़े अंतर से हराया, जिससे संसद में सत्ताधारी गठबंधन की मजबूत पकड़ एक बार फिर साबित हो गई है। यह जीत एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि यह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर उसकी स्थिति को और मजबूत करती है। जीत के आंकड़े और राजनीतिक संदेश सुबह से शुरू हुई मतदान प्रक्रिया शाम तक जारी रही, जिसमें कुल 767 वोट डाले गए। इनमें से 752 वोट वैध पाए गए, जबकि 15 वोट अवैध घोषित कर दिए गए। मतदान के बाद हुई मतगणना में, एनडीए के प्रत्याशी सी.पी. राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोटों से संतोष करना पड़ा। वोटों का यह अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि एनडीए का समर्थन आधार संसद में कितना व्यापक और संगठित है। राधाकृष्णन की 452 वोटों की संख्या एनडीए के एकजुट वोट बैंक को दर्शाती है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल थे। इस जीत ने न केवल उनकी व्यक्तिगत योग्यता को प्रमाणित किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सत्ताधारी गठबंधन के पास महत्वपूर्ण विधायी निर्णयों को लागू करने के लिए आवश्यक संख्या बल मौजूद है। दूसरी ओर, विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को मिले 300 वोट भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। यह संख्या दिखाती है कि विपक्षी एकता अभी भी एक महत्वपूर्ण ताकत है और वह सरकार की नीतियों का विरोध करने और जनता के मुद्दों को उठाने के लिए पर्याप्त संख्या में सांसद जुटा सकती है। यह भविष्य में होने वाले विधायी और राजनीतिक संघर्षों के लिए एक संकेत है कि विपक्ष अपनी आवाज को सशक्त बनाए रखने के लिए तैयार है। राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव उपराष्ट्रपति के रूप में सी.पी. राधाकृष्णन की जीत से आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर कई तरह के प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। इस पद पर एनडीए के एक उम्मीदवार का होना सरकार के लिए विधायी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होगा, खासकर जब राज्यसभा में बिल पास करने की बात आती है। यह सरकार को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करेगा और महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करने में आने वाली बाधाओं को कम कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव परिणाम 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सत्ताधारी गठबंधन के मजबूत जनादेश की पुष्टि करता है। यह दिखाता है कि गठबंधन का विश्वास और समर्थन अभी भी बरकरार है। यह जीत एनडीए के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और इससे भविष्य में होने वाले अन्य चुनावों में भी उसके मनोबल को मजबूती मिलेगी। सी.पी. राधाकृष्णन अपनी जीत के बाद मीडिया के सामने आए और उन्होंने सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें वोट दिया। उन्होंने कहा कि वह संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने और उपराष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुसार कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विपक्ष को भी साथ लेकर चलने की बात कही और कहा कि वे सभी दलों के साथ मिलकर देश के विकास के लिए काम करेंगे। यह चुनाव केवल एक पद की जीत नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच शक्ति संतुलन का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी है। भले ही विपक्ष इस चुनाव में सफल न हो पाया हो, लेकिन उनके वोटों की संख्या ने यह संदेश दिया है कि भारतीय लोकतंत्र में उनका भी महत्वपूर्ण स्थान है और वे लगातार अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।

उपराष्ट्रपति चुनाव: एनडीए के सी.पी. राधाकृष्णन ने 452 वोटों से जीत दर्ज की, विपक्ष के बी. सुदर्शन रेड्डी को हराया

नई दिल्ली, 09 सितंबर 2025 – (समय बोल रहा ) – आज के उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने एक निर्णायक जीत हासिल कर देश के अगले उपराष्ट्रपति का पद संभाल लिया है। इस चुनाव में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को बड़े अंतर से हराया, जिससे संसद में सत्ताधारी गठबंधन…

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नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025 – (समय बोल रहा ) – दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लाखों यात्रियों की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो में सफर करना आज से महंगा हो गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने लगभग आठ साल बाद किराए में बढ़ोतरी की है, जिसका सीधा असर रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों की जेब पर पड़ेगा। DMRC ने एक बयान जारी कर किराए में संशोधन की पुष्टि की है, जो आज यानी 25 अगस्त से ही प्रभावी हो गए हैं। यह बढ़ोतरी सामान्य मेट्रो लाइनों और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन दोनों पर लागू होगी। किराए में कितनी हुई बढ़ोतरी? डी.एम.आर.सी. के अनुसार, किराए में यह बदलाव मामूली है, लेकिन इससे न्यूनतम और अधिकतम दोनों किराए प्रभावित हुए हैं। सामान्य मेट्रो लाइनों पर: किराए में ₹1 से ₹4 तक की वृद्धि की गई है। एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर: किराया ₹1 से ₹5 तक बढ़ाया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद, दिल्ली मेट्रो का न्यूनतम किराया ₹11 और अधिकतम किराया ₹64 हो गया है। यह नई दरें सभी स्टेशनों और रूटों पर लागू होंगी। स्मार्ट कार्ड यूजर्स को मिलेगी राहत इस किराए वृद्धि के बीच, उन यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है जो स्मार्ट कार्ड (Smart Card) का उपयोग करते हैं। स्मार्ट कार्ड से यात्रा करने वालों को पहले की तरह किराए में छूट मिलती रहेगी, जो कि नियमित यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है। यह कदम DMRC द्वारा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और यात्रियों को स्मार्ट कार्ड का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने का एक प्रयास भी है। 8 साल बाद क्यों बढ़ा किराया? दिल्ली मेट्रो में पिछली बार किराया वृद्धि 2017 में हुई थी। इसके बाद से, मेट्रो के संचालन और रखरखाव की लागत में काफी वृद्धि हुई है। बिजली, कर्मचारियों के वेतन, मरम्मत, और नई परियोजनाओं पर होने वाले खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इन बढ़ती लागतों को पूरा करने और मेट्रो सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए, DMRC को किराया बढ़ाना पड़ा। DMRC का कहना है कि यह वृद्धि मेट्रो के भविष्य के संचालन और नए विस्तार योजनाओं के लिए जरूरी है। आम जनता पर असर और प्रतिक्रियाएं किराए में बढ़ोतरी का सीधा असर रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो मेट्रो को अपनी यात्रा का मुख्य साधन मानते हैं। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह एक अतिरिक्त बोझ साबित होगा। हालांकि, DMRC का कहना है कि मेट्रो अभी भी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन का सबसे सस्ता और सबसे कुशल साधन है, खासकर बढ़ते पेट्रोल और डीजल की कीमतों के मुकाबले। कुछ यात्री इस फैसले से निराश हैं, जबकि कुछ इसे परिचालन लागतों को देखते हुए एक आवश्यक कदम मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भविष्य की योजनाएं और चुनौतियाँ किराया वृद्धि से प्राप्त राजस्व का उपयोग मेट्रो सेवाओं को बेहतर बनाने, नई लाइनों का निर्माण करने और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव में किया जाएगा। आने वाले समय में, दिल्ली मेट्रो अपनी कनेक्टिविटी का विस्तार करने और यात्रियों को और भी बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की योजना बना रही है। हालांकि, इस किराया वृद्धि के बाद, यह देखना होगा कि क्या यह कदम यात्रियों की संख्या पर कोई नकारात्मक प्रभाव डालता है या नहीं।

दिल्ली मेट्रो में आज से सफर हुआ महंगा: 8 साल बाद DMRC ने बढ़ाया किराया, स्मार्ट कार्ड यूजर्स को मिलेगी राहत

नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025 – (समय बोल रहा ) – दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लाखों यात्रियों की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो में सफर करना आज से महंगा हो गया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने लगभग आठ साल बाद किराए में बढ़ोतरी की है, जिसका सीधा असर रोजाना…

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नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025 – (समय बोल रहा ) – सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने जूनियर इंटेलिजेंस ऑफिसर (Junior Intelligence Officer) के 394 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आज से शुरू हो गए हैं, और इच्छुक उम्मीदवार गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) की आधिकारिक वेबसाइट mha.gov.in या ncs.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जिनके पास इंजीनियरिंग और तकनीकी योग्यता है। वैकेंसी का विवरण: जानें किस वर्ग में कितने पद इस भर्ती के तहत कुल 394 पदों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है। यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार प्रतिनिधित्व मिले। कुल पद: 394 जनरल (General): 157 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS): 32 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 117 अनुसूचित जाति (SC): 60 अनुसूचित जनजाति (ST): 28 यह वर्गीकरण सभी वर्गों के उम्मीदवारों को समान अवसर प्रदान करता है, जिससे समाज के सभी तबकों के युवा सरकारी सेवाओं में शामिल हो सकें। शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और सैलरी इस पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास कुछ विशिष्ट शैक्षणिक योग्यताएं होनी अनिवार्य हैं: योग्यता: उम्मीदवारों के पास इंजीनियरिंग डिप्लोमा, बी.टेक, बीएससी, या बीसीए की डिग्री होना आवश्यक है। यह पद तकनीकी प्रकृति का है, इसलिए इन योग्यताओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। आयु सीमा: आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 27 साल होनी चाहिए। सरकारी नियमों के अनुसार, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी, जिससे उन्हें भी आवेदन करने का मौका मिल सके। सैलरी: चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक सैलरी पैकेज मिलेगा। पे मैट्रिक्स में लेवल-4 के तहत ₹25,500 से ₹81,100 प्रति माह की सैलरी दी जाएगी। इसके अलावा, बेसिक सैलरी का 20% विशेष सुरक्षा भत्ता (SSA) भी मिलेगा, जिससे कुल सैलरी ₹80,000 से अधिक हो सकती है। चयन प्रक्रिया और आवेदन शुल्क भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए एक बहु-चरणीय चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है: ऑनलाइन एग्जाम: सबसे पहले एक ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाएगी। स्किल टेस्ट: ऑनलाइन परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को स्किल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। इंटरव्यू/पर्सनैलिटी टेस्ट: अंतिम चयन के लिए इंटरव्यू या पर्सनैलिटी टेस्ट लिया जाएगा। आवेदन शुल्क: आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को निम्नलिखित शुल्क का भुगतान करना होगा: सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस: ₹650 एससी/एसटी/महिला: ₹550 आवेदन करने का तरीका उम्मीदवार इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद सरल है: सबसे पहले, mha.gov.in या ncs.gov.in की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर, 'Online application for Junior Intelligence Officer Grade-II/Tech 2025-IB recruitment.' लिंक पर क्लिक करें। एक नया पेज खुलेगा, जिसमें एक पीडीएफ होगी। उस पीडीएफ में दिए गए लिंक को अपने ब्राउज़र में टाइप करें। अब ऑनलाइन आवेदन फॉर्म खुल जाएगा। फॉर्म में मांगी गई सभी आवश्यक जानकारियों जैसे योग्यता, अनुभव, फोटो और स्कैन किए गए हस्ताक्षर अपलोड करें। ऑफिशियल पेमेंट पोर्टल के माध्यम से अपनी आवेदन फीस जमा करें। फॉर्म सबमिट करने से पहले एक बार उसका रिव्यू जरूर कर लें। फॉर्म सबमिट करने के बाद, कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए उसका प्रिंटआउट लेकर रखें। यह भर्ती प्रक्रिया सरकारी नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक शानदार मौका है। आवेदन करने से पहले, उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक अधिसूचना को ध्यान से पढ़ें।

सरकारी नौकरी: इंटेलिजेंस ब्यूरो में 394 पदों पर भर्ती, आज से आवेदन शुरू, 80 हजार से ज्यादा मिलेगी सैलरी

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025 – (समय बोल रहा ) – सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर सामने आया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने जूनियर इंटेलिजेंस ऑफिसर (Junior Intelligence Officer) के 394 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आज से…

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काशीपुर, 2 जून, 2025 (समय बोल रहा ) - (पर्यावरण दिवस) प्रकृति, जो मानव जीवन की जन्मदात्री और सतत संगिनी रही है, आज मानवीय स्वार्थ और असंतुलन के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है। यह सर्वविदित है कि सभ्यताएं और संस्कृतियाँ इसी प्रकृति की छांव में विकसित हुई हैं, और जीवन का निरंतर प्रवाह इसके संतुलन पर ही निर्भर करता है। लेकिन जब मनुष्य इस मूल सत्य को भूलकर अपने स्वार्थ के दायरे को लांघता है, तो जीवनदायिनी प्रकृति ही क्षतिग्रस्त होती है। मानव अक्सर यह विस्मृत कर देता है कि वह स्वयं भी इसी प्रकृति का एक अभिन्न अंग है। आज, पर्यावरणीय संकट की गंभीर गूंज वैश्विक चेतना को झकझोर रही है, और इसी गहन अनुभूति के तहत संयुक्त राष्ट्र संघ प्रतिवर्ष 5 जून को 'विश्व पर्यावरण दिवस' का आयोजन करता है, ताकि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया जा सके। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के नेतृत्व में 'बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन' अभियान इस वैश्विक पहल से प्रेरणा लेते हुए, संत निरंकारी मिशन की सामाजिक शाखा, संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन, ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के लोकमंगलकारी और दूरदर्शी नेतृत्व में एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस वर्ष निर्धारित थीम 'बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन' (प्लास्टिक प्रदूषण को हराओ) को केंद्र में रखते हुए, फाउंडेशन देशभर के 18 प्रमुख पर्वतीय पर्यटक स्थलों पर एक व्यापक वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन कर रही है। यह महा-अभियान 5 जून को प्रातः 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक चलेगा, जिसमें हजारों स्वयंसेवक और नागरिक भागीदारी करेंगे। संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन का यह प्रयास केवल स्वच्छ, हरित और संतुलित पर्यावरण की दिशा में एक सशक्त कदम ही नहीं है, बल्कि यह आज की युवा पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने और संरक्षण की भावना को उनके व्यवहार में उतारने की एक प्रेरणादायक पहल भी है। यह एक ऐसा अभियान है जो सेवा, सद्भाव और सजगता जैसे मानवीय मूल्यों को जनचेतना से जोड़ता है, जिससे एक सामूहिक और सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है। निरंतर प्रयास: 2014 से चला आ रहा पर्यावरण कार्यक्रम संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा ने इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मिशन वर्ष 2014 से ही संयुक्त राष्ट्र के 'यूनाइटेड नेशन एनवायरनमेंट प्रोग्राम' (UNEP) की थीम पर 'विश्व पर्यावरण दिवस' का आयोजन कर रहा है। यह केवल एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक सतत जनचेतना अभियान है जिसका उद्देश्य प्रकृति और मानवता के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध को पुनः सशक्त करना है। मिशन का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण एक निरंतर प्रक्रिया है जिसे केवल एक दिन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। 18 प्रमुख पर्वतीय एवं पर्यटक स्थल बने अभियान के केंद्र इस महाअभियान के अंतर्गत देश के विविध प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण 18 प्रमुख पर्वतीय एवं पर्यटक स्थलों को सम्मिलित किया गया है। इन स्थलों को विशेष रूप से चुना गया है ताकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश व्यापक रूप से फैल सके और इन खूबसूरत प्राकृतिक स्थानों को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त किया जा सके। इन प्रमुख स्थलों में शामिल हैं: उत्तराखंड से: मसूरी, ऋषिकेश, लैंसडाउन, नैनीताल, चकराता एवं भवाली। हिमाचल प्रदेश से: शिमला, मनाली और धर्मशाला। गुजरात से: सापुतारा। महाराष्ट्र से: महाबलेश्वर, पंचगनी, खंडाला, लोनावाला, पन्हाला एवं सोमेश्वर। सिक्किम से: गीजिंग। कर्नाटक से: सुरम्य नंदी हिल्स। ये सभी स्थल न केवल प्रकृति की गोद में बसे हुए हैं, बल्कि अब पर्यावरण जागृति के प्रति समर्पित ऐसे केंद्र बिंदु बन रहे हैं जहाँ निष्काम सेवा और सामूहिक सहभागिता एक साथ साकार हो रही हैं। विशेष रूप से, काशीपुर यूनिट नंबर 180 से भी सेवादारों के अंदर इस पर्यावरण दिवस पर स्वच्छता अभियान में शामिल होने के लिए भरपूर उत्साह देखने को मिल रहा है, जो स्थानीय स्तर पर भी इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करेगा। जन-जागरूकता के लिए रचनात्मक पहल इस अवसर पर मिशन के स्वयंसेवक, सेवादल सदस्य, श्रद्धालुजन एवं स्थानीय नागरिक एकजुट होकर कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना के साथ करेंगे। इसके बाद, युवा स्वयंसेवक प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों और उसके समाधान पर जन-जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न रचनात्मक माध्यमों का उपयोग करेंगे। इनमें नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और प्रभावशाली संदेश शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण संरक्षण से संबंधित युक्त तख्तियाँ और बैनर लिए मानव श्रृंखला बनाकर समाज को प्रेरित किया जाएगा। यह प्रभावी तरीका लोगों को सीधे जोड़ने और उन्हें पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित करेगा। इस विश्व पर्यावरण दिवस पर संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन का यह समर्पित प्रयास एक सार्थक संदेश देता है। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति परमात्मा का अमूल्य उपहार है, और उसका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। आइए, हम सभी मिलकर पर्यावरण की रक्षा करें और अपनी भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और संतुलित पृथ्वी का निर्माण करने में योगदान दें।

बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’: संत निरंकारी मिशन का 18 पर्वतीय स्थलों पर महा-अभियान, पर्यावरण दिवस से पहले तैयारी शुरू!

काशीपुर, 2 जून, 2025 (समय बोल रहा ) – (पर्यावरण दिवस) प्रकृति, जो मानव जीवन की जन्मदात्री और सतत संगिनी रही है, आज मानवीय स्वार्थ और असंतुलन के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है। यह सर्वविदित है कि सभ्यताएं और संस्कृतियाँ इसी प्रकृति की छांव में विकसित हुई हैं, और जीवन का निरंतर…

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नई दिल्ली, 28 मई 2025 (समय बोल रहा): देश भर के स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं, और इसी के साथ लाखों लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने या पहाड़ों की ठंडी वादियों में घूमने का प्लान बनाकर निकल पड़े हैं। लेकिन, छुट्टियों के इस खुशनुमा माहौल में भी ट्रेनों की अनियंत्रित लेटलतीफी ने रेल यात्रियों की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल समेत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, गोरखपुर और मुजफ्फरनगर जैसे प्रमुख रूटों पर चलने वाली ट्रेनें घंटों देरी से पहुंच रही हैं, जिससे यात्रियों को भीषण गर्मी में प्लेटफॉर्म पर लंबा और थकाऊ इंतजार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। राप्तीगंगा एक्सप्रेस की बदहाली: चार घंटे की देरी ने यात्रियों को रुलाया ट्रेनों की देरी का ताजा और सबसे बड़ा उदाहरण गोरखपुर से आने वाली राप्तीगंगा एक्सप्रेस का है। देहरादून रेलवे स्टेशन अधीक्षक रविंद्र कुमार ने बताया कि यह महत्वपूर्ण ट्रेन मंगलवार को अपने निर्धारित समय से करीब चार घंटे की देरी से शाम छह बजे देहरादून पहुंची। इतनी बड़ी देरी के कारण, इस ट्रेन को देहरादून से भी अपने अगले गंतव्य के लिए तीन घंटे 45 मिनट की देरी से रात सात बजे रवाना किया जा सका। ट्रेनों की इस भयावह अनियमितता ने यात्रियों को, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को, भारी असुविधा में डाल दिया है। मैदानी शहरों की तपिश से पहाड़ों का रुख, पर रेलवे की चुनौती मई-जून का महीना आते ही, मैदानी इलाकों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे में लाखों लोग मैदानी शहरों की तपिश से राहत पाने के लिए पर्वतीय राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की ओर रुख करते हैं। स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने से यह भीड़ और भी बढ़ जाती है, क्योंकि परिवार बच्चों के साथ हिल स्टेशनों की तरफ पलायन करते हैं। इन पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों के लिए रेलवे अक्सर परिवहन का सबसे किफायती और पसंदीदा साधन होता है। लेकिन, ट्रेनों की लगातार देरी उनके सफर को आरामदायक रहने के बजाय एक दुःस्वप्न में बदल रही है। समर स्पेशल ट्रेनों की भी यही कहानी: वेटिंग लिस्ट और निराशा रेलवे विभाग ने गर्मियों के सीजन में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए और उनकी सुविधा के लिए कई समर स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। ये ट्रेनें यूपी के कई शहरों सहित दिल्ली-एनसीआर, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण रूटों पर अतिरिक्त सेवाएं प्रदान कर रही हैं। हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से, इन समर स्पेशल ट्रेनों में भी सीटों की वेटिंग लिस्ट काफी लंबी है। इसका मतलब है कि यात्रियों को, विशेषकर जो आखिरी समय में टिकट बुक करते हैं, कंफर्म सीट नहीं मिल पा रही है। यह स्थिति उन लोगों के लिए और भी मुश्किल पैदा कर रही है, जिन्होंने पहले से अपनी छुट्टियों की योजना बना रखी है और अब टिकट न मिलने के कारण अपनी यात्रा रद्द करने या महंगी वैकल्पिक व्यवस्था करने पर मजबूर हैं। रेलवे को सुधारने होंगे इंतजाम: यात्रियों को चाहिए समयबद्ध और आरामदायक सफर ट्रेनों की यह लगातार लेटलतीफी सीधे तौर पर लाखों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को प्रभावित कर रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है। खासकर ऐसे समय में जब बच्चे छुट्टी पर होते हैं और परिवार एक साथ यात्रा करना चाहते हैं, ट्रेनों का समय पर न चलना निराशाजनक है। रेलवे प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तुरंत और गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्हें ट्रेनों के संचालन को सुचारु बनाने और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए युद्धस्तर पर प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। समय पर ट्रेनों का चलना न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि इससे रेलवे की विश्वसनीयता और छवि भी मजबूत होगी।

सावधान! गर्मियों की छुट्टियों में सफर बना आफत: ट्रेनों की लेटलतीफी ने छीनी यात्रियों की ‘खुशी’, अब प्लेटफॉर्म पर घंटों इंतजार!

नई दिल्ली, 28 मई 2025 (समय बोल रहा): देश भर के स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं, और इसी के साथ लाखों लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने या पहाड़ों की ठंडी वादियों में घूमने का प्लान बनाकर निकल पड़े हैं। लेकिन, छुट्टियों के इस खुशनुमा माहौल में भी ट्रेनों की अनियंत्रित लेटलतीफी…

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