फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के विरोध में काशीपुर की सड़कों पर उतरा यादव समाज, लगाई प्रतिबंध की मांग
काशीपुर 25 फरवरी 2026 (समय बोल रहा)
शहर में आज उस समय माहौल गर्मा गया जब सैकड़ों की संख्या में यादव समाज के लोग कथित विवादित फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के विरोध में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फिल्म के माध्यम से यादव समाज को ‘लव जिहाद’ जैसे संवेदनशील मुद्दे से जोड़कर समाज की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है।
आक्रोशित लोगों ने फिल्म के निर्माता संदीप तोमर और निर्देशक अंकित भड़ाना के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार व केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से फिल्म पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
उनका कहना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी समाज को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
गौरवशाली इतिहास को बदनाम करने का आरोपप्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यादव समाज का इतिहास देशभक्ति, बलिदान और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहा है। ऐसे में फिल्म के कथानक के माध्यम से समाज को संदिग्ध रूप में दिखाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।
उन्होंने सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस आधार पर ऐसी फिल्म को अनुमति दी गई, जो समाज में वैमनस्य फैलाने का कारण बन सकती है।
समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि फिल्म पर जल्द रोक नहीं लगाई गई तो यह आंदोलन काशीपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशव्यापी स्वरूप ले सकता है।
प्रदर्शन में मौजूद सतविंदर यादव, आकाश कांबोज और राजकुमार यादव समेत अन्य वक्ताओं ने कहा कि “सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” साथ ही उन्होंने निर्माता-निर्देशक से सार्वजनिक माफी की मांग भी की।प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांगविवाद को बढ़ता देख समाज के प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित न हो।
उनका आरोप है कि कुछ व्यावसायिक लाभ के लिए जानबूझकर ऐसे विषयों का चयन किया जाता है, जिससे समाज की भावनाएं आहत होती हैं।काशीपुर में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर ‘अभिव्यक्ति की आजादी बनाम सामाजिक जिम्मेदारी’ की बहस को तेज कर दिया है। अब सभी की नजरें सरकार और सेंसर बोर्ड के आगामी कदम पर टिकी हैं कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए फिल्म पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा या विवाद और गहराएगा।

