गुरु गोविंद सिंह जयंती पर उत्तराखंड में 27 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश

guru gobind singh ji painting c

उत्तराखंड 26 दिसंबर 2025 (समय बोल रहा)

गुरु गोविंद सिंह जयंती के उपलक्ष्य में सरकारी अवकाश घोषित कर दिया गया है। यह अवकाश राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, बोर्ड/निगम कार्यालयों और अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों पर लागू रहेगा। आम तौर पर यह दिन सिख समुदाय के लिए बेहद आस्था और धार्मिक महत्व रखता है और इसे देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उत्तराखंड सरकार द्वारा इसे सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के बाद अब इस दिन सरकारी स्कूल, कॉलेज और अधिकांश सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे।

गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे, जिनका जीवन त्याग, वीरता और न्याय के लिए संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। उनका जन्मदिन हर वर्ष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर गुरुद्वारों में कीर्तन, लंगर सेवा, नगर कीर्तन और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। अवकाश घोषित होने के बाद राज्यभर में इन कार्यक्रमों के आयोजित होने की संभावना और बढ़ जाती है, क्योंकि छुट्टी होने के कारण आम लोग बड़ी संख्या में गुरुद्वारों में पहुंचते हैं।अवकाश का फायदा उन लोगों को भी मिलेगा जो अपने परिवार के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होना चाहते हैं।

सरकारी कर्मचारी, विद्यार्थी और विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत लोग इस दिन अवकाश का उपयोग धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक कार्यों में कर सकते हैं। सिख समुदाय द्वारा इसे बहुत सम्मान के साथ मनाया जाता है और हर वर्ष इस दिन राज्य के प्रमुख गुरुद्वारों में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार, हल्द्वानी सहित कई शहरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी जाती है।हालांकि बैंकों और निजी संस्थानों की छुट्टी उनके आंतरिक प्रावधानों पर निर्भर करेगी। कई निजी स्कूल या संस्थान भी इस अवकाश का पालन करते हैं, लेकिन इसकी पुष्टि संबंधित संस्था के स्तर पर होती है। सरकारी दफ्तरों में सभी नियमित कार्य अगले कार्य दिवस पर निपटाए जाएंगे।

जिन लोगों को प्रशासनिक कार्य, दस्तावेज़ सत्यापन या सरकारी आवेदन करवाने हैं, उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि 27 तारीख को दफ्तर बंद रहेंगे और उन्हें अपने काम की योजना उसी अनुसार बनानी चाहिए।कुल मिलाकर यह अवकाश राज्य के लोगों को गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन और शिक्षाओं को स्मरण करने का अवसर देता है।

उनके आदर्श — साहस, सेवा, त्याग और धर्म रक्षा — आज भी समाज के लिए प्रेरणा हैं। 27 दिसंबर को उत्तराखंड में धार्मिक उत्साह का वातावरण देखने की पूरी संभावना है।

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