देहरादून यूनिवर्सिटी में छात्रों की गुटबाज़ी का विस्फोट: फायरिंग कांड के बाद 7 गिरफ्तार

देहरादून, 28 अगस्त 2025 (समय बोल रहा ) – देहरादून में उच्च शिक्षा संस्थानों में लगातार बढ़ रही अराजकता का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के भीतर पढ़ाई की जगह गुटबाज़ी और दबंगई का खेल इस कदर हावी हो गया कि दो छात्र गुटों के बीच हुई वर्चस्व की लड़ाई गोलीबारी तक जा पहुँची। इस गंभीर घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सात छात्रों को गिरफ्तार किया है। कैंपस के बाहर हुई फायरिंग घटना यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर स्थित एक बॉयज पीजी (पेइंग गेस्ट) के पास हुई। आपसी वर्चस्व को लेकर दो छात्र गुटों के बीच शुरू हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया और बात फायरिंग तक पहुँच गई। गोली चलने की आवाज सुनते ही आसपास हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुँचने से पहले ही आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर आरोपियों की पहचान की। जांच में यह सामने आया है कि इस विवाद के पीछे कैंपस के भीतर अपनी दादागिरी स्थापित करने की होड़ थी। सात छात्र गिरफ्तार, सभी उत्तर प्रदेश के निवासी इस मामले में पुलिस ने सात छात्रों को गिरफ्तार किया है और उन्हें भारी मुचलके पर पाबंद किया है। गिरफ्तार किए गए छात्रों की पहचान इस प्रकार है: वैभव तिवारी (वाराणसी, यूपी) उत्तम सैनी (सहारनपुर, यूपी) मयंक चौहान (बिजनौर, यूपी) आयुष (अमरोहा, यूपी) युवराज (सहारनपुर, यूपी) अर्जुन (देवबंद, यूपी) दिव्य (बिजनौर, यूपी) यह बात भी सामने आई है कि इनमें से कई छात्र पहले भी कैंपस के अंदर विभिन्न विवादों और गुटबाज़ी में शामिल रहे हैं। इन छात्रों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। शिक्षा की जगह पनप रही है अराजकता यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि क्या उच्च शिक्षा संस्थान सिर्फ डिग्री बाँटने का माध्यम बनकर रह गए हैं? पढ़ाई के नाम पर दाखिला लेने वाले ये छात्र असल में गुंडागर्दी और दबंगई में लिप्त हैं। आकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अब तक विभिन्न यूनिवर्सिटियों से 85 ऐसे छात्रों को निष्कासित किया जा चुका है। इस तरह की घटनाओं से यह भी स्पष्ट होता है कि कैंपस के माहौल पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की पकड़ ढीली हो चुकी है। छात्रों की जगह उपद्रवी तत्वों ने कैंपस को अपना ठिकाना बना लिया है, जिससे शिक्षा का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है। जिम्मेदारी किसकी? यह सिर्फ छात्रों की गुंडागर्दी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन की विफलता है। जब तक प्रशासन कैंपस के भीतर और बाहर होने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी नहीं रखेगा, तब तक शिक्षा का माहौल ऐसे ही अराजकता की भेंट चढ़ता रहेगा। यह समय है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन न केवल दाखिला प्रक्रिया को सख्त करे, बल्कि ऐसे तत्वों को कैंपस से पूरी तरह निष्कासित कर दे।

देहरादून, 28 अगस्त 2025 (समय बोल रहा ) देहरादून में उच्च शिक्षा संस्थानों में लगातार बढ़ रही अराजकता का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के भीतर पढ़ाई की जगह गुटबाज़ी और दबंगई का खेल इस कदर हावी हो गया कि दो छात्र गुटों के बीच हुई वर्चस्व की लड़ाई गोलीबारी तक जा पहुँची। इस गंभीर घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सात छात्रों को गिरफ्तार किया है।

कैंपस के बाहर हुई फायरिंग

घटना यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर स्थित एक बॉयज पीजी (पेइंग गेस्ट) के पास हुई। आपसी वर्चस्व को लेकर दो छात्र गुटों के बीच शुरू हुई बहस ने हिंसक रूप ले लिया और बात फायरिंग तक पहुँच गई। गोली चलने की आवाज सुनते ही आसपास हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

पुलिस के मौके पर पहुँचने से पहले ही आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ के आधार पर आरोपियों की पहचान की। जांच में यह सामने आया है कि इस विवाद के पीछे कैंपस के भीतर अपनी दादागिरी स्थापित करने की होड़ थी

सात छात्र गिरफ्तार, सभी उत्तर प्रदेश के निवासी

इस मामले में पुलिस ने सात छात्रों को गिरफ्तार किया है और उन्हें भारी मुचलके पर पाबंद किया है। गिरफ्तार किए गए छात्रों की पहचान इस प्रकार है:

  1. वैभव तिवारी (वाराणसी, यूपी)
  2. उत्तम सैनी (सहारनपुर, यूपी)
  3. मयंक चौहान (बिजनौर, यूपी)
  4. आयुष (अमरोहा, यूपी)
  5. युवराज (सहारनपुर, यूपी)
  6. अर्जुन (देवबंद, यूपी)
  7. दिव्य (बिजनौर, यूपी)

यह बात भी सामने आई है कि इनमें से कई छात्र पहले भी कैंपस के अंदर विभिन्न विवादों और गुटबाज़ी में शामिल रहे हैं। इन छात्रों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।

शिक्षा की जगह पनप रही है अराजकता

यह घटना एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि क्या उच्च शिक्षा संस्थान सिर्फ डिग्री बाँटने का माध्यम बनकर रह गए हैं? पढ़ाई के नाम पर दाखिला लेने वाले ये छात्र असल में गुंडागर्दी और दबंगई में लिप्त हैं। आकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अब तक विभिन्न यूनिवर्सिटियों से 85 ऐसे छात्रों को निष्कासित किया जा चुका है।

इस तरह की घटनाओं से यह भी स्पष्ट होता है कि कैंपस के माहौल पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की पकड़ ढीली हो चुकी है। छात्रों की जगह उपद्रवी तत्वों ने कैंपस को अपना ठिकाना बना लिया है, जिससे शिक्षा का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।

जिम्मेदारी किसकी?

यह सिर्फ छात्रों की गुंडागर्दी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन की विफलता है। जब तक प्रशासन कैंपस के भीतर और बाहर होने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी नहीं रखेगा, तब तक शिक्षा का माहौल ऐसे ही अराजकता की भेंट चढ़ता रहेगा। यह समय है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन न केवल दाखिला प्रक्रिया को सख्त करे, बल्कि ऐसे तत्वों को कैंपस से पूरी तरह निष्कासित कर दे।

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